Formula 1 India Return: करीब दस साल बाद भारत में एक बार फिर Formula 1 की वापसी की उम्मीद जगी है। ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर आखिरी बार 2013 में फॉर्मूला 1 रेस हुई थी। उसके बाद कई कारणों से यह रेस भारत से बाहर हो गई। अब भारतीय सरकार इस मशहूर रेस को वापस लाने की दिशा में गंभीर कोशिश करती दिख रही है।
Formula 1 India Return

हाल ही में खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट का दौरा किया। उन्होंने वहां मौजूद आयोजकों से कहा कि वे किसी प्रोफेशनल इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के साथ मिलकर काम करें, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर के मोटरस्पोर्ट इवेंट्स फिर से भारत में हो सकें। सरकार और फॉर्मूला 1 मैनेजमेंट के बीच बातचीत चल रही है, हालांकि अभी तक फॉर्मूला 1 कैलेंडर में भारत की कोई तय तारीख शामिल नहीं हुई है।
सरकार का साफ मानना है कि इस बार वही गलतियां दोबारा नहीं दोहराई जाएंगी, जिनकी वजह से पहले इंडियन ग्रां प्री बंद करना पड़ा था।
क्यों बंद हुई थी इंडियन ग्रां प्री और अब क्या बदलेगा

इंडियन ग्रां प्री की शुरुआत 2011 में हुई थी और यह रेस बहुत जल्दी फैंस के बीच लोकप्रिय हो गई। स्टेडियम भरे रहते थे, टीवी पर दुनिया भर में भारत का नाम जाता था और ट्रैक भी काफी आधुनिक था। Red Bull के ड्राइवर Sebastian Vettel
ने 2011 से 2013 तक लगातार तीन बार यहां जीत हासिल की थी।

लेकिन इतनी सफलता के बावजूद यह रेस ज्यादा समय तक नहीं चल पाई। इसकी सबसे बड़ी वजह सरकार की टैक्स नीति थी। Formula 1 को खेल की बजाय “मनोरंजन” की कैटेगरी में डाल दिया गया था। इससे भारी टैक्स लगने लगे, जिससे रेस आयोजित करना बहुत महंगा हो गया।
F 1 India Return
इसके अलावा, बाहर से आने वाली टीमों के कार, उपकरण और स्टाफ पर भी भारी कस्टम ड्यूटी लगती थी। इन सब खर्चों की वजह से आयोजन करने वाली कंपनी को लगातार नुकसान होने लगा। 2014 में रेस को एक साल के लिए रोका गया था, लेकिन 2015 में भी वापसी नहीं हो पाई और धीरे-धीरे इंडियन ग्रां प्री पूरी तरह खत्म हो गई।
अब हालात बदलते दिख रहे हैं। सरकार यह समझ रही है कि Formula 1 सिर्फ एक इवेंट नहीं, बल्कि भारत की ग्लोबल पहचान और बिज़नेस के लिए भी फायदेमंद है। भारत में कारों और मोटरस्पोर्ट के शौकीनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, और फॉर्मूला 1 भी नए बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।
हालांकि चुनौतियां अब भी हैं। फॉर्मूला 1 का कैलेंडर पहले से ही काफी भरा हुआ है और हर देश रेस की मेजबानी करना चाहता है। भारत को यह दिखाना होगा कि वह लंबे समय तक रेस को संभाल सकता है, नियम साफ होंगे और आयोजकों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
अगर सब कुछ सही दिशा में गया, तो आने वाले सालों में एक बार फिर बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर फॉर्मूला 1 की गाड़ियां दौड़ती नजर आ सकती हैं और भारतीय फैंस के लिए यह किसी बड़े सपने के पूरा होने जैसा होगा।
Also Read: PCB का बड़ा दांव! क्या सरकार की मर्जी के खिलाफ भारत से होगा मुकाबला?























