महाराष्ट्र सरकार ने राज्य मामलों की जांच के लिए सीबीआई को दी गई आम सहमति को वापस ले लिया है। शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत के बाद महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सीबीआई की राजनीतिक उपयोग को लेकर संदेह की स्थिति बन चुकी है।
गृह मंत्री देशमुख ने कहा, सीबीआई की राजनीतिक उपयोग को लेकर संदेह की स्थिति बन चुकी है। सीबीआई बहुत ही पेशेवर तरीके से जांच करती है, लेकिन राजनीतिक लाभ लेने के लिए संगठन पर बनाया गया दबाव सही नहीं है, इसलिए, हमने यह निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि टीआरपी केस में उत्तर प्रदेश में एफआईआर दर्ज होने के बाद इस केस को सीबीआई को ट्रांसफर करने की आशंका उत्पन्न हो गई। दिल्ली पुलिस विशेष प्रतिष्ठान अधिनियम की धारा 6 राज्य में जांच के लिए राज्यों को सहमति अनिवार्य करने का अधिकार देती है।
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अनिल देशमुख से पहले संजय राउत ने गुरुवार को उद्धव सरकार के इस फैसले को सही ठहराते हुए कहा, एक राष्ट्रीय मुद्दे के मामले में सीबीआई को जांच करने का अधिकार है। राज्य के मामलों में पहले से ही हमारी पुलिस द्वारा जांच की जा रही है, इसमें हस्तक्षेप के कारण हमें यह निर्णय लेना पड़ा।’
दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान के सदस्यों को एक कानून के तहत राज्य में शक्तियों और न्यायक्षेत्र के इस्तेमाल की सहमति को वापस लेने संबंधी एक आदेश बुधवार को जारी किया। जिसके अनुसार इस कदम के तहत सीबीआई को अब राज्य में शक्तियों और न्यायाक्षेत्र के इस्तेमाल के लिए आम सहमति नहीं होगी जो महाराष्ट्र सरकार द्वारा 22 फरवरी 1989 को जारी एक आदेश के तहत दी गई थी और उसे किसी मामले की जांच के लिए राज्य सरकार की अनुमति लेनी होगी।
अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले की जांच पहले मुंबई पुलिस कर रही थी। लेकिन बाद में मामला पटना में अभिनेता के पिता द्वारा दर्ज कराये गए एक प्राथमिकी के आधार पर सीबीआई के सुपुर्द कर दिया गया था। सूत्रों के अनुसार अब अगर सीबीआई किसी मामले की जांच करना चाहती है तो उसे सहमति के लिए राज्य सरकार से संपर्क करना होगा।


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