सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसवीएन भट्टी ने बुधवार को कथित कौशल विकास निगम घोटाला मामले में सीआईडी द्वारा अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ तेलुगु देशम पार्टी सुप्रीमो और आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने बिना कोई विशेष कारण बताए कहा, जस्टिस भट्टी को मामले की सुनवाई को लेकर कुछ आपत्तियां हैं। पीठ मामले को सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमत नहीं हुई और कहा कि वह इस मामले को केवल 3 अक्टूबर से ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर सकती है।
अदालत को सूचित किए जाने के बाद कि मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग करते हुए सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के समक्ष फिर से उल्लेख किया जाएगा, मामले में कोई विशेष तारीख नहीं दी। इस बीच, टीडीपी प्रमुख की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा एक अलग पीठ के तत्काल सुनवाई के लिए याचिका का उल्लेख करने के लिए सीजेआई के अदालत कक्ष में गए। शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर 26 सितंबर की देर रात प्रकाशित पूरक वाद सूची के अनुसार, मामला न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और एसवी भट्टी की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था।
इससे पहले 25 सितंबर को सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने नायडू की ओर से किए गए आउट-ऑफ-टर्न उल्लेख को स्वीकार नहीं किया था, लेकिन वरिष्ठ वकील लूथरा को तत्काल सूचीबद्ध करने के निर्देश के लिए मंगलवार को मामले का नए सिरे से उल्लेख करने के लिए कहा था। 22 सितंबर को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एस रेड्डी की एकल पीठ द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने और उनकी न्यायिक हिरासत को रद्द करने की याचिका खारिज करने के बाद नायडू ने विशेष अनुमति याचिका दायर करके सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।


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