तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता तथा पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ मंत्री सुब्रत मुखर्जी को मंगलवार को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घर लौटे, जहां उन्हें नारद स्टिंग टेप मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय के अगले आदेश तक नजरबंद कर दिया गया।
अधिकारियों ने कहा कि मुखर्जी को सभी औपचारिकताएं पूरी करने के लिये प्रेसिडेंसी सुधार गृह लाया गया, जहां उन्हें एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती करने से पहले रखा गया था।
इसके बाद उन्हें कोलकाता पुलिस के वाहन में बेलीगंज स्थित उनके आवास पर लाया गया।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इस मामले में सीबीआई की एक अदालत द्वारा मुखर्जी, मंत्री फरहाद हाकिम, टीएमसी विधायक मदन मित्रा और पार्टी के पूर्व नेता शोभन चटर्जी को दी गई जमानत पर 17 मई को रोक लगा दी थी, जिसके बाद उसी दिन उन्हें गिरफ्तार कर सुधार गृह ले जाया गया था।
चटर्जी, मुखर्जी और मित्रा को तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हाकिम को बुखार आने के बाद सुधार गृह के स्वास्थ्य देखभाल केन्द्र में ले जाया गया था।
नारद टीवी न्यूज चैनल के मैथ्यू सैमुअल ने 2014 में कथित स्टिंग ऑपरेशन किया था जिसमें तृणमूल कांगेस के मंत्री, सांसद और विधायक लाभ के बदले में कंपनी के प्रतिनिधियों से कथित तौर पर धन लेते नजर आए। उस वक्त चारों नेता ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री थे।
यह टेप पश्चिम बंगाल में 2016 के विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सार्वजनिक हुआ था।


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