शिवसेना ने बुधवार को केंद्र सरकार के उस बयान की आलोचना की जिसमें सरकार ने उच्चतम न्यायालय में कहा था कि उसे ब्रिटेन में चल रही “गोपनीय” कार्यवाही की जानकारी नहीं है जिससे भगोड़े व्यवसायी विजय माल्या को भारत में प्रत्यर्पित करने में देर हो रही है। शराब का कारोबारी विजय माल्या, कथित तौर पर लगभग नौ हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और धन शोधन मामले में भारत में वांछित है और वर्तमान में ब्रिटेन में रह रहा है।
केंद्र सरकार ने सोमवार को न्यायालय को बताया था कि माल्या को तब तक प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता जब तक ब्रिटेन में उसके विरुद्ध चल रही ‘न्यायिक और गोपनीय’ कार्यवाही समाप्त नहीं हो जाती। सरकार ने यह भी कहा था कि उसे माल्या के विरुद्ध चल रही इस कार्यवाही की जानकारी नहीं है क्योंकि भारत सरकार का उसमें कोई पक्ष नहीं है।
शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में लिखे संपादकीय में कहा गया, “विपक्ष जब कोई जानकारी मांगता है तब सरकार कहती है कि उसके पास कोई आंकड़े नहीं है। अदालत जब विवरण मांगती है तब सरकार के वकील कहते हैं कि उनके पास कोई जानकारी नहीं है। सरकार कितनी बार और कितने मामलों में कहेगी कि उसे ‘नहीं पता।
सामना में कहा गया, “सरकार यह दावा करती है कि उसे एक अभिनेता द्वारा की गई आत्महत्या, बॉलीवुड का ड्रग्स से संबंध और हाथरस मामले पर कथित षड्यंत्र की पूरी जानकारी है, लेकिन उसे माल्या के मामले में हो रही कार्यवाही की कोई जानकारी नहीं है जो भारत के हजारों करोड़ रुपये लेकर भाग गया है।”


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