सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना के 16 विधायकों की अयोग्यता और एकनाथ शिंदे के शपथ ग्रहण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट में दोनों पक्षों की ओर से जोरदार बहस देखने को मिली। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आज कोई भी आदेश देने से इनकार करते हुए मामले को सुनवाई के लिए 1 अगस्त को सूचीबद्ध किया है।
उद्धव ठाकरे गुट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमण की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में था तो महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को नयी सरकार को शपथ नहीं दिलानी चाहिए थी। पीठ में न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति हिमा कोहली भी शामिल हैं।
सिब्बल ने कहा कि जिस तरह से सरकार को गिराया गया था, वह लोकतंत्र का मजाक था। उन्होंने कहा कि अयोग्यता की याचिका लंबित होने के बाद भी शपथ ग्रहण का आयोजन किया गया था। उन्होंने कहा कि शपथग्रहण के लिए याचिका पर फैसला होने तक इंतजार किया जा सकता था, लेकिन यह जल्दी में करा दिया गया।
बेदखल कर दी जाएगी देश की हर चुनी हुई सरकार
कपिल सिब्बल ने कहा कि यदि इस मामले को स्वीकार कर लिया गया तो फिर देश की हर चुनी हुई सरकार बेदखल कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह सरकार गैरकानूनी है और इसे बने रहने का कोई हक नहीं है। पार्टी द्वारा नामित आधिकारिक सचेतक के अलावा किसी अन्य सचेतक को विधानसभाध्यक्ष द्वारा मान्यता दिया जाना दुर्भावनापूर्ण है।
बिना पार्टी छोड़े सवाल करना दलबदल नहीं
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि लोकतंत्र में लोग एकजुट हो सकते हैं और प्रधानमंत्री से कह सकते हैं कि ‘माफ करें, आप पद पर नहीं रह सकते।’’ उन्होंने कहा कि अगर कोई नेता पार्टी के भीतर ही समर्थन (बहुमत) जुटाता है और बिना पार्टी छोड़े (नेतृत्व से) सवाल करता है तो यह दलबदल नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी में बड़ी संख्या में लोगों को लगता है कि किसी अन्य नेता को नेतृत्व करना चाहिए, तो इसमें क्या गलत है।
दरअसल, प्रधान न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने 11 जुलाई को उद्धव ठाकरे गुट के विधायकों को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए महाराष्ट्र के विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर से कहा था कि वे उनकी अयोग्यता के अनुरोध वाली याचिका पर आगे कार्रवाई नहीं करें।


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