TIPRA Protest Against Bangladesh: त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में बांग्लादेश के एक बयान से युवा प्रदर्शन पर उतर आए हैं। दरअसल शुक्रवार को सैकड़ों आदिवासी युवा और छात्र बांग्लादेश के डिप्टी हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शन करते हुए नजर आए। इस प्रदर्शन का कारण बांग्लादेश के एक राजनीतिक नेता के भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के बारे में कथित तौर पर दिया आपत्तिजनक बयान था।
TIPRA Protest Against Bangladesh: हसनत अब्दुल्ला के बयान पर नाराजगी
ये प्रदर्शन Youth TIPRA Federation (YTF) ने आयोजित किया, जो त्रिपुरा का प्रमुख आदिवासी युवा संगठन है। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश की नई पार्टी, नेशनल सिटिजन्स पार्टी (NCP) के नेता हसनत अब्दुल्ला के कथित बयान के खिलाफ विरोध जताया। अब्दुल्ला ने कहा था कि यदि भारत बांग्लादेश को अस्थिर करने का प्रयास करता है, तो ढाका भारत के पूर्वोत्तर के ‘सेवन सिस्टर्स’ राज्यों को अलग करने की कोशिश का समर्थन कर सकता है।
YTF और अन्य प्रदर्शनकारियों ने इसे भारत की संप्रभुता और पूर्वोत्तर राज्यों की एकता पर सीधे हमला बताया। हसनत अब्दुल्ला पहले ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन’ आंदोलन के संयोजक रह चुके हैं, जिन्होंने 2024 में बांग्लादेश में छात्र-जन आंदोलन का नेतृत्व किया था।

Bangladesh Deputy High Commission: YTF की चेतावनी और संदेश
प्रदर्शन के दौरान आदिवासी युवाओं और छात्रों ने बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस के खिलाफ भी नारे लगाए। हालांकि, डिप्टी हाई कमीशन के बाहर सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित किया। YTF के अध्यक्ष सूरज देबबर्मा ने कहा कि बांग्लादेश की नई पीढ़ी शायद भूल गई है कि उनका देश भारत की मदद और 1971 के मुक्ति संग्राम में भारतीय सेना के बलिदान से बना था।

उन्होंने कहा, “आज भारत को दुश्मन के रूप में दिखाया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।” सूरज देबबर्मा ने यह भी याद दिलाया कि बांग्लादेश के एक पूर्व सैन्य अधिकारी ने भी कथित रूप से पूर्वोत्तर भारत को सिलिगुड़ी कॉरिडोर से अलग करने की बात कही थी।

Agartala Protest: सीमा सुरक्षा और भविष्य की कार्रवाई
YTF अध्यक्ष ने यह साफ किया कि इस प्रदर्शन का उद्देश्य बांग्लादेश को यह संदेश देना था कि पूर्वोत्तर भारत का समुद्र तक कोई सीधा रास्ता नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह के बयान और कदम जारी रहे, तो यह टिप्रासा लोगों की प्रतिक्रिया को मजबूर कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इसी साल YTF ने दक्षिण त्रिपुरा के बेलोनिया में भारत-बांग्लादेश सीमा के पास बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन बांग्लादेश द्वारा सीमा के पास कथित अवैध तटबंध निर्माण के खिलाफ किया गया था।
YTF के अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि भारत-बांग्लादेश की 4 हजार किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा की कड़ी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। यदि केंद्र ऐसा करने में असफल रहता है, तो आदिवासी लोगों को अपनी जमीन और हितों की रक्षा के लिए सक्षम बनाने की आवश्यकता है।
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