पिछले कुछ समय से कर्नाटक की राजनीति में उठापटक जारी है वहीं ये अटकलें भी जोरों पर हैं कि सत्तारूढ़ भाजपा का एक हिस्सा येदियुरप्पा को पद से हटाने की कोशिश कर रहा है। कर्नाटक में भाजपा आलाकमान के नेतृत्व बदलने के फैसले के मद्देनजर मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा और उनके खेमे के विधायकों ने उनके समर्थन में एक चौतरफा अभियान शुरू किया है।
पार्टी सूत्रों ने कहा, पार्टी के भीतर घटनाक्रम तेज हो गया है। नई दिल्ली में आरएसएस नेताओं और वरिष्ठ नेताओं को चेतावनी दी गई है कि अगर सीएम येदियुरप्पा को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जाता है तो परिणाम भुगतने होंगे। राज्य भर में विभिन्न वीरशैव-लिंगायत मठों के धार्मिक संतों के माध्यम से एक आंदोलन शुरू करने का भी निर्णय लिया गया है। यहां तक कि जब येदियुरप्पा ने खुद को अगले दो वर्षों तक सीएम बने रहेंगे का घोषित कर दिया है।
भाजपा का कोई भी बड़ा नेता उनके समर्थन में घोषणा करने के लिए आगे नहीं आया है। इसलिए येदियुरप्पा की टीम भाजपा आलाकमान से मांग करने की योजना बना रही है कि वे राज्य में नेतृत्व के मुद्दे पर से पर्दा हटा दें। सूत्र बताते हैं, ”उनके संज्ञान में यह भी लाया जाएगा कि अगर वे इस दिशा में काम नहीं करते हैं तो राज्य में भाजपा को भारी नुकसान होगा।’ अखिला भारत वीरशैव महासभा के अध्यक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शमनूर शिवशंकरप्पा ने चेतावनी दी थी कि अगर सीएम येदियुरप्पा को इस्तीफा देने के लिए कहा गया तो कर्नाटक में बीजेपी पार्टी बर्बाद हो जाएगी।
भाजपा नेताओं को इतिहास में जाना चाहिए और लिंगायत नेतृत्व को परेशान करने के परिणामों के बारे में जानना चाहिए। उन्होंने कहा, अगर सीएम येदियुरप्पा के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाती है, तो समुदाय बीजेपी को मुंहतोड़ जवाब देगा। एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम में एक और शक्तिशाली कांग्रेसी नेता एम.बी. पाटिल ने कहा कि अगर वे नेतृत्व बदलने की कोशिश करते हैं तो भाजपा लिंगायत वोट बैंक का आधार खो देगी।


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