PGIMER टेलीमेडिसिन के 21 साल, डिजिटल हेल्थ सेवाओं से मजबूत हुई देश की पहुंच

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Chandigarh News: पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ के टेलीमेडिसिन विभाग ने 13 अप्रैल 2026 को अपना 21वां स्थापना दिवस ऑनलाइन माध्यम से मनाया। यह आयोजन भारत में टेलीहेल्थ सेवाओं, शिक्षा और शोध के क्षेत्र में विभाग की दो दशक से अधिक की उपलब्धियों को दर्शाता है। कार्यक्रम में देशभर के विशेषज्ञों और स्वास्थ्य पेशेवरों ने भाग लिया और टेलीमेडिसिन के भविष्य पर चर्चा की। कार्यक्रम की शुरुआत में पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने संबोधित करते हुए कहा कि टेलीमेडिसिन ने स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

Chandigarh News: दीप प्रज्वलन और पारंपरिक शुरुआत

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उन्होंने बताया कि यह तकनीक दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए एक मजबूत माध्यम बनकर उभरी है, जिससे उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल रही है। उन्होंने आगे कहा कि संस्थान का टेलीमेडिसिन विभाग नए प्रयोगों, प्रशिक्षण और मरीज-केंद्रित डिजिटल सेवाओं के जरिए इस क्षेत्र में लगातार योगदान दे रहा है। भविष्य में एक सुरक्षित, मजबूत और समावेशी डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली बनाना बेहद जरूरी होगा। कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक दीप प्रज्वलन भी किया गया, जो ज्ञान, विकास और नवाचार का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर ने कार्यक्रम को एक सकारात्मक और प्रेरणादायक शुरुआत दी।

विभागीय प्रगति रिपोर्ट

टेलीमेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रो. बिमान सैकिया ने पिछले वर्ष की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विभाग ने टेलीपरामर्श सेवाओं में काफी सुधार किया है और अधिक लोगों तक पहुंच बनाई है। इसके अलावा, ई-लर्निंग मॉड्यूल तैयार किए गए, जिससे चिकित्सा शिक्षा को डिजिटल रूप में आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने विभिन्न सहयोगी परियोजनाओं और राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य अभियानों के तहत चलाए जा रहे आउटरीच कार्यक्रमों की भी जानकारी दी।

मुख्य अतिथि का व्याख्यान: शैडो एआई पर चिंता

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. सुनील श्रॉफ ने “स्वास्थ्य सेवा में शैडो एआई और डेटा सुरक्षा” विषय पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि आजकल बिना अनुमति के एआई टूल्स का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिसे “शैडो एआई” कहा जाता है। यह प्रवृत्ति मरीजों के डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता के लिए खतरा बन सकती है। उन्होंने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके उल्लंघन से गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने डॉक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों से अपील की कि वे डेटा सुरक्षा और नैतिक तकनीक के उपयोग को प्राथमिकता दें और इस बारे में जागरूकता बढ़ाएं।

टेलीमेडिसिन के इकोसिस्टम पर विशेष व्याख्यान

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण डॉ. उमा नाम्बियार का व्याख्यान रहा, जिसका विषय था “टेलीमेडिसिन के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम की आवश्यकता”। उन्होंने बताया कि टेलीमेडिसिन को सफल बनाने के लिए केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि नीति, डॉक्टरों, संस्थानों और मरीजों के बीच तालमेल जरूरी है। उन्होंने कहा कि एक प्रभावी प्रणाली के लिए इंटरऑपरेबिलिटी, प्रशिक्षण, संस्थागत सहयोग और लोगों की भागीदारी जरूरी है।

उनके अनुसार, अगर सभी पक्ष मिलकर काम करें तो टेलीमेडिसिन के जरिए हर व्यक्ति तक समान स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं। कार्यक्रम के अंत में डॉ. अमित अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी वक्ताओं, आयोजकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके सहयोग से यह कार्यक्रम सफल हो सका।

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