लुधियाना-अमृतसर : शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधी कमेटी की ओर से निकाले गए 523 कर्मचारियों को आज पुन: गुरू घर की नौकरी पर बहाल कर दिया गया। देर शाम तक इन निकाले कर्मचारियों को दोबारा बहाल करते हुए इन को नियुक्ति पत्र प्रदान कर दिए गए। एसजीपीसी की ओर इन निकालने गए कर्मचारियों के मामले पर एसजीपीसी की कार्यकारिणी कमेटी की ओर से बनाई गई सब जांच कमेटी की सिफारिशों पर इन कर्मचारयिों को बहाल कर दिया गया है।
उधर आज शिरोमणि कमेटी से बरखास्त किए गए सदस्यों में से सरहुसन सिंह नामक बरखास्त कर्मचारी ने 2 दिन पहले कमेटी की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए सलफास खा ली थी। जिसकी हालत बिगडऩे उपरांत गुरू रामदास अस्पताल में इलाज के लिए दाखिल करवाया गया था। उसके स्वास्थ्य का हाल जानने के लिए शिरोमणि कमेटी के प्रधान गोबिंद सिंह लोंगोवाल अन्य पदाधिकारियों के साथ अस्पताल पहुंचे। इस मोके पर कमेटी सचिव डॉ रूप सिंह भी उपस्थित थे। नियुक्ति पत्र देने की पुष्टि करते हुए लोंगोवाल ने आशा व्यक्त की कि मुलाजिमों की बहाली के उपरांत उन्हें आशा है कि कर्मचारी अब ईमानदारी के साथ सेवा करेंगे।
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एसजीपीसी के गत वर्ष निकाले गए 523 कर्मचारी , नौकरी से निकाले जाने के बाद से ही अपनी बहाली के लिए आवाज बुलंद कर रहे है। जिनमें से बहुत सारे कर्मचारी अदालत की शरण में अपनी बहाली के लिए चले गए थे। इन कर्मचारियों ने एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह ने अपने कार्यभार को संभाले के बाद इन कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर एक जांच कमेटी गठित की थी। जिस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट देकर इन 523 कर्मचारियों की भर्ती कानून व नियमों से बाहर होने के कारण इन की सेवाएं खत्म करने की सिफारिशें दे दी थी।
जिस के चलते इन कर्मचारियों की सेवाएं खत्म कर दी गई थी। इन निकाले गए कर्मचारियों को एसजीपीसी की पूर्व अध्यक्ष प्रो किरपाल सिंह बडूंगर के कार्यकाल के दौरान भर्ती किया गया था। उस वक्त आरोप लगाए जा रहे थे कि 750 के करीब कर्मचारी प्रो बडूंगर के वक्त में गलत भर्ती है। जिस की जांच के लिए एक जांच कमेटी बनाई गई थी। जांच कमेटी ने इन कर्मचारियों में से 523 की सेवाएं खत्म करने के आदेश दिए। यह कर्मचारी तभी से लेकर आज तक अपनी बहाली के लिए आवाज उठाते आ रहे थे।
इन कर्मचारियों ने कई बार आंदोलन भी शुरू किया। परंतु हर बार इन को आश्वासन के सिवा कुछ भी नहीं मिला। आखिल 28 मार्च को इन कर्मचारियों ने एसजीपीसी के मुख्यालय के बाहर असीमित समय के लिए अनशन शुरू कर दिया था। जिस के चलते हर रोज दो दो कर्मचारी अनशन पर बैठते थे। अलग अलग राजनीतिक पार्टियां, समाजिक व पंथक संगठनों ने भी आंदोलनकारियों के आंदोलन का समर्थन करना शुरू कर दिया था।
आंदोलन के दौरान 8 अप्रैल को आंदोलनकारी कर्मचारी सुखमन हरहुसन सिंह निवासी तरनतारन के धरने के दौरान देर शाम को जहरीला पदार्थ निगल कर एसजीपीसी के अधिकारियों की नीतियों के खिलाफ रोष प्रगट करते हुए आत्म हत्या की कोशिश थी। जिस को तुरंत सोमवार देर रात्रि श्री गुरु राम दास अस्पताल में दाखिल करवाया गया। वह वह अभी भी उपचाराधीन है और डाक्टरों के अनुसार उसकी हालत खतरे से बाहर है। आखिर सुखमन हरहुसन की कुर्बानी रंग लाई और एसजीपीसी के अधिकारियों को सभी निकाले गए कर्मचारियों को बहाल करने के आदेश जारी करते हुए नियुक्तपत्र जारी कर दिए।
एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने एसजीपीसी कार्यालय में इकट्ठे हुए निकाले गए कर्मचारियों के पहुंच कर उनको दोबारा अपनी पहले वाली ड्यूटी पर हाजिर करने का एलान किया। इस के बाद उनकी ओर से कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी पर हाजिर होने के कारण एक आफिशियल पत्र भी जारी किया। उन्होंने कहा कि सभी निकाले गए कर्मचारियों की सेवाएं बहाल कर दी गई है। अब इन सभी कर्मचारियों से अपील है कि यह सभी कर्मचारी इमानदारी निष्ठा और गुरु के भय में रह कर अपनी ड्यूटी निभाएं।
इस के बाद लोगोंवाल श्री गुरु राम दास अस्तपाल की इमरजैंसी वार्ड के आईसीयू में दाखिल उपचाराधीन कर्मचारी सरहुसन सिंह का हालचाल भी पूछने के लिए गए। जिसने गत दिन जहरीला पदार्थ निगलते हुए एसजीपीसी के अधिकारियों की धक्काशाही के खिलाफ आत्महत्या करने की की कोशिश की थी। इस दौरान लोंगोवाल के साथ एसजीपीसी कार्यकारिणी कमेटी के सदस्य भाई मंजीत सिंह , राम सिंह , भगवंत सिहं सियालका, बाबा सिंह गुमानपुरा, सज्जन सिंह बज्जूमान, गुरनाम सिंह जस्सल, एसजीपीसी के मुख्य सचिव डा रूप सिंह, सचिव महिंदर सिंह आहली, पीए सुखमिंदर सिंह , सुखदेव सिंह भूरा कोहना आदि भी मौजूद थे।
– सुनीलराय कामरेड


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