Matru Navami Shraddha 2026: मातृ नवमी आज! ऐसे करें दिवंगत माताओं का करें तर्पण, जानें शुभ मुहूर्त और श्राद्ध विधि

Summary :

यह आर्टिकल मातृ नवमी श्राद्ध 2026 के बारे में जानकारी प्रदान करता है, जो इस वर्ष 4 अक्टूबर, रविवार को पड़ रहा है। पितृपक्ष में यह दिन विशेष रूप से परिवार की दिवंगत माताओं और अन्य महिला पूर्वजों के श्राद्ध और तर्पण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मातृ नवमी 4 अक्टूबर 2026, रविवार को है। यह दिन मृत माताओं और महिला पूर्वजों को समर्पित है, जिनके आशीर्वाद से परिवार में खुशहाली आती है और बच्चों की तरक्की होती है।

Matru Navami Shraddha 2026: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पितृपक्ष की नवमी का श्राद्ध आज यानी 4 अक्टूबर 2026, रविवार को किया जा रहा है। पितृपक्ष में मातृ नवमी बहुत खास मानी जाती है। यह दिन विशेष रूप से परिवार की मृत माताओं और अन्य महिला पूर्वजों के श्राद्ध और तर्पण के लिए होता है। माना जाता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से पूर्वजों को याद करने पर उनका आशीर्वाद मिलता है। आइए, जानते हैं कि नवमी श्राद्ध का सही समय और इसकी विधि क्या है।

नवमी श्राद्ध का सही समय क्या है? (Navami Shraddha 2026 Timing)

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा (कुल अवधि: 47 मिनट)।
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:33 बजे से दोपहर 1:20 बजे तक रहेगा (कुल अवधि: 47 मिनट)।
  • अपराह्न काल: दोपहर 1:20 बजे से शाम 3:42 बजे तक रहेगा (कुल अवधि: 2 घंटे 22 मिनट)।

मातृ नवमी श्राद्ध विधि (Matru Navami Shraddha Vidhi)

Matru Navami Shraddha 2026
Matru Navami Shraddha 2026 (Source: Social Media)
  • सुबह जल्दी उठकर दिवंगत महिलाओं को याद करें और श्राद्ध करने का संकल्प लें।
  • तर्पण के लिए काले तिल और सफेद फूलों का इस्तेमाल करें। यह काम मुख्य रूप से घर की बहू या कोई अन्य महिला करती है।
  • चावल या जौ के आटे से पिंड बनाएं। इसमें घी, दूध और चीनी मिलाकर भी पिंड तैयार किए जा सकते हैं।
  • पिंडदान के साथ जल अर्पित करें और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।
  • भोजन में से पंचबलि (5 जीवों के लिए हिस्सा) निकालें, मां की पसंद का खाना बनाएं और किसी ब्राह्मणी को भोजन कराएं।
  • अगर दिवंगत महिला सुहागिन थीं, तो उन्हें श्रृंगार का सामान दान करें।
  • कंडे (गोबर के उपले) पर हवन करके मृत महिलाओं को आदरपूर्वक विदा करें, उनकी मुक्ति और घर की खुशहाली की प्रार्थना करें।

मातृ नवमी का महत्व (Matru Navami Significance​)

पितृ पक्ष की नवमी तिथि को ‘मातृ नवमी’ कहते हैं, क्योंकि यह दिन मुख्य रूप से मृत माताओं को याद करने का दिन है। माना जाता है कि इस दिन महिलाओं की आत्माएं घर आती हैं और तर्पण से प्रसन्न होती हैं। इस दिन को देवी मां की पूजा से भी जोड़कर देखा जाता है। यह दिन बच्चों की तरक्की, परिवार की खुशहाली और माताओं का आशीर्वाद पाने के लिए बहुत उत्तम माना गया है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।