पितृ पक्ष में मृत्यु होना
गरुड़ पुराण के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान मृत्यु होना बहुत शुभ और भाग्यशाली माना जाता है। माना जाता है कि इन 16 दिनों में किसी की मौत होना बहुत कम देखने को मिलता है। अगर ऐसा होता है, तो इसका अर्थ है कि उस व्यक्ति को मोक्ष मिल गया है।
घर-परिवार पर बनी रहती है कृपा
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि अगर पितृ पक्ष के समय किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उसके पूर्वजों का आशीर्वाद उसके पूरे परिवार पर हमेशा बना रहता है। इतना ही नहीं, मृत्यु के बाद उस व्यक्ति की आत्मा को सीधे स्वर्ग में जगह मिलती है।
जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के पवित्र 16 दिनों में स्वर्ग और पितृलोक के द्वार खुले रहते हैं तथा पूर्वज स्वयं पृथ्वी पर मौजूद होते हैं, इसलिए इस दौरान प्राण त्यागने वाली आत्मा को पूर्वजों का सीधा मार्गदर्शन और आशीर्वाद मिलता है, जिससे उसके पुराने पाप कट जाते हैं और उसे यमलोक की यातनाओं के बजाय सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है, जिसके बाद उसे बार-बार धरती पर जन्म लेने और मरने के चक्र से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है।
पितृ पक्ष में अकाल मृत्यु होना
अगर पितृ पक्ष में किसी व्यक्ति की मौत सामान्य तरीके से न होकर किसी हादसे या आत्महत्या से होती है, तो इसे अच्छा नहीं माना जाता। अकाल मृत्यु होने पर आत्मा को शांति नहीं मिलती और परिवार पर पितृ दोष लगने का डर रहता है। ऐसी स्थिति में आत्मा की शांति के लिए किसी पवित्र धार्मिक स्थल पर जाकर खास तरीके से पिंडदान और तर्पण किया जाता है।


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