दुनियाभर में 2040 तक प्लास्टिक के चलते स्वास्थ्य जोखिम दोगुने होने की संभावना : स्टडी

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नई दिल्ली, 27 जनवरी (आईएएनएस)। अगर मौजूदा तरीकों में बदलाव से जुड़े ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण खतरनाक हो जाएंगे। वहीं, साल 2040 तक प्लास्टिक सेहत के लिए दोगुना खतरा पैदा कर सकता है। द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च में बताया गया है कि प्लास्टिक के पूरे जीवनचक्र के हर चरण में सेहत को नुकसान होता है। यह नुकसान फॉसिल फ्यूल निकालने से शुरू होता है, जो 90 प्रतिशत से ज्यादा प्लास्टिक बनाने का कच्चा माल हैं। इसके बाद उत्पादन, इस्तेमाल और अंत में उसका निपटान या…

नई दिल्ली, 27 जनवरी (आईएएनएस)। अगर मौजूदा तरीकों में बदलाव से जुड़े ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण खतरनाक हो जाएंगे। वहीं, साल 2040 तक प्लास्टिक सेहत के लिए दोगुना खतरा पैदा कर सकता है।

द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च में बताया गया है कि प्लास्टिक के पूरे जीवनचक्र के हर चरण में सेहत को नुकसान होता है। यह नुकसान फॉसिल फ्यूल निकालने से शुरू होता है, जो 90 प्रतिशत से ज्यादा प्लास्टिक बनाने का कच्चा माल हैं। इसके बाद उत्पादन, इस्तेमाल और अंत में उसका निपटान या पर्यावरण में छोड़ा जाना हर चरण में जहरीले तत्व निकलते हैं, जो इंसानों और पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक हैं।

इस स्टडी में 2016 से 2040 के बीच प्लास्टिक की खपत और कचरा प्रबंधन से जुड़े कई संभावित भविष्य के हालात का वैश्विक मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की तुलना की गई है।

अगर सब कुछ ऐसे ही चलता रहा, तो 2040 तक प्लास्टिक से होने वाले स्वास्थ्य पर बुरे प्रभाव दोगुने हो सकते हैं। इसमें ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन और उससे बढ़ते वैश्विक तापमान का स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नुकसान में लगभग 40 प्रतिशत योगदान होगा।

हवा में प्रदूषण, जो ज्यादातर प्लास्टिक बनाने की प्रक्रियाओं से होता है, इसका हिस्सा 32 प्रतिशत होगा। वहीं, प्लास्टिक के पूरे जीवनचक्र में पर्यावरण में छोड़े जाने वाले जहरीले रसायनों का प्रभाव 27 प्रतिशत होगा।

रिसर्चरों ने बताया कि बाकी स्वास्थ्य नुकसान (1 प्रतिशत से कम) पानी की कमी, ओजोन परत पर असर और आयनाइजिंग रेडिएशन बढ़ने से जुड़े हैं।

लंदन स्कूल की मेगन डीनी ने कहा कि उनके अध्ययन में पाया गया है कि प्लास्टिक के पूरे जीवनचक्र के दौरान होने वाले उत्सर्जन ग्लोबल वार्मिंग, हवा के प्रदूषण और विषाक्त पदार्थों से इंसानों की सेहत पर बुरा असर डालते हैं। इसमें कैंसर और गैर-संचारी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। सबसे ज्यादा नुकसान प्लास्टिक के निर्माण और खुले में जलाने से होता है।

स्टडी में पाया गया कि अगर प्लास्टिक सिस्टम में पॉलिसी, आर्थिक स्थिति, इंफ्रास्ट्रक्चर, सामग्री या उपभोक्ता व्यवहार में कोई बदलाव नहीं होता है, तो सालाना स्वास्थ्य पर असर दोगुना से भी ज्यादा बढ़ सकता है। 2016 में इसका नुकसान 2.1 मिलियन स्वस्थ जीवन वर्ष था, जो 2040 तक बढ़कर 4.5 मिलियन स्वस्थ जीवन वर्ष तक पहुंच सकता है।

कुल मिलाकर, स्टडी के अनुसार 2016 से 2040 के बीच ग्लोबल प्लास्टिक सिस्टम के कारण लोगों की 83 मिलियन साल की स्वस्थ जीवन अवधि कम हो सकती है।

स्टडी में यह भी बताया गया कि केवल प्लास्टिक कचरा इकट्ठा करने और रीसाइक्लिंग में सुधार करने से बहुत बड़ा असर नहीं होगा। लेकिन, कचरा इकट्ठा करने और रीसाइक्लिंग के साथ-साथ सामग्री बदलने या दोबारा इस्तेमाल करने से प्लास्टिक से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान में कमी देखी गई।

टीम ने कहा कि प्लास्टिक उत्सर्जन और इसके स्वास्थ्य पर असर को कम करने के लिए, नीति बनाने वालों को नए प्लास्टिक के उत्पादन को बेहतर तरीके से नियंत्रित करना चाहिए और गैर-जरूरी इस्तेमाल को काफी कम करना चाहिए।

–आईएएनएस

एसएचके/एबीएम

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