Baghpat News: बागपत में गन्ना किसानों से जुड़ा एक अहम विषय फिर चर्चा में आ गया है। पेराई सत्र 2025-26 अपने अंतिम दौर में है, लेकिन बागपत सहकारी चीनी मिल में गन्ने की मात्रा मिल की क्षमता से ज्यादा बताई जा रही है। इस स्थिति को लेकर बागपत सदर विधायक योगेश धामा ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने इस संबंध में उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल्स संघ, लखनऊ के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
Baghpat News: मिल की क्षमता से अधिक गन्ना
विधायक का कहना है कि पिछले वर्षों की तरह इस बार भी बागपत चीनी मिल के पास जरूरत से ज्यादा गन्ना पहुंच रहा है। मिल की पेराई क्षमता सीमित है, ऐसे में यदि समय पर गन्ने की निकासी नहीं हुई तो काफी मात्रा में गन्ना खेतों में ही खड़ा रह जाएगा। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। गन्ना एक ऐसी फसल है जिसे समय पर मिल तक पहुंचाना जरूरी होता है, वरना उसकी गुणवत्ता और वजन दोनों पर असर पड़ता है।
किसानों के भुगतान में देरी की आशंका
सबसे बड़ी चिंता किसानों के भुगतान को लेकर है। यदि मिल पर गन्ने का दबाव बढ़ता है तो पेराई की रफ्तार धीमी हो सकती है। इससे गन्ने का भुगतान भी प्रभावित होगा। पहले भी कई बार किसानों को अपने बकाये के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा है। ऐसे में यदि अतिरिक्त गन्ना अन्य मिलों को नहीं भेजा गया, तो भुगतान में देरी होना तय माना जा रहा है।
अन्य मिलों में स्थानांतरण की मांग
योगेश धामा ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि जिन चीनी मिलों में पेराई की क्षमता उपलब्ध है और जो किसानों को समय पर भुगतान करती हैं, वहां अतिरिक्त गन्ने को भेजा जाए। उन्होंने कहा कि बागपत चीनी मिल की ओर से भी इस संबंध में अनुरोध किया गया है। इसलिए प्रशासन को बिना देरी किए इस पर फैसला लेना चाहिए। इससे पेराई प्रक्रिया सुचारु रूप से चलती रहेगी और किसानों को भी राहत मिलेगी।
हजारों परिवारों की आजीविका का सवाल
गन्ना खेती बागपत जिले की बड़ी आबादी की आय का मुख्य स्रोत है। हजारों किसान और उनके परिवार इस फसल पर निर्भर हैं। यदि गन्ना समय पर नहीं बिकेगा या भुगतान में देरी होगी, तो किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है। खेती के लिए उन्होंने जो लागत लगाई है, उसकी भरपाई भी समय पर भुगतान मिलने से ही संभव है।
त्वरित फैसले की जरूरत
विधायक ने प्रशासन से अपील की है कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाए और तुरंत कार्रवाई की जाए। यदि समय रहते अतिरिक्त गन्ने का समुचित प्रबंधन कर लिया जाता है तो किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन यदि निर्णय में देरी हुई तो इसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ेगा। कुल मिलाकर यह मामला केवल मिल प्रबंधन या सरकारी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बागपत के हजारों गन्ना किसानों की रोजी-रोटी से जुड़ा हुआ है। अब सबकी नजर प्रशासन के फैसले पर टिकी है।
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रिपोर्ट: मेहंदी हसन


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