5 Facts About NCERT Books : गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने NCERT (नेशनल कौंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) की सोशल साइंस की आठवीं क्लास की एक किताब पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए उस पर बैन लगाने का निर्देश दिया. अदालत की नाराज़गी किताब के एक चैप्टर पर थी जिसका शीर्षक है ‘करप्शन इन ज्यूडिशरी (न्यायपालिका में भ्रष्टाचार)’ है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह ऐसा प्रतीत होता है जैसे संस्थागत प्राधिकरण को कमजोर करने और न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने का एक सुनियोजित प्रयास हो। जिस चलते कोर्ट ने उन सारी प्रतियों को वापस लेने का आदेश दिया है चाहे वो डिजिटल रूप में हो, ऑनलाइन हो या हार्ड कॉपी.
इस चलते एक बार फिर NCERT विवादों में घिर गई। यह पहला मामला नहीं जब NCERT को लेकर इस तरह विवाद गरमाया हो, इससे पहले भी विवाद होते रहे हैं और NCERT की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए गए हों। जानिए NCERT के पहले विवाद-
5 Facts About NCERT Books : मुगल और दिल्ली सल्तनत पर अध्यायों के निष्कासन से जुड़ा विवाद

2023-24 में, कक्षा 7 और 12 की इतिहास की पुस्तकों से नई एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों से मुगल और दिल्ली सल्तनत के सभी उल्लेख हटा दिए गए। इसके बजाय, प्राचीन भारतीय वंशों, भूगोल, महाकुंभ मेला और सरकारी योजनाओं जैसे मेक इन इंडिया और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ पर नए अध्याय जोड़े गए। ये पाठ्यपुस्तकें नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे (एनसीएफएसई) 2023 के अनुरूप तैयार की गई।
NCERT Controversy : मराठा बनाम राजपूत से जुड़ा विवाद

मामला कुछ यूं है कि किताब में मराठा इतिहास को 22 पेज का स्थान दिया गया है, जबकि राजपूत इतिहास को मात्र 2 पेज में समेट दिया गया है. इस अंतर को लेकर लोग नाराज हैं और इसे ‘इतिहास के साथ अन्याय’ बता रहे हैं.
SC to Ban NCERT Books : टीपू सुल्तान पर विवाद
टीपू सुल्तान के बारे में विषयवस्तु को हटाने या कम करने पर भी बहस छिड़ी, जिन्हें कुछ लोग प्रारंभिक स्वतंत्रता संग्राम योद्धा मानते हैं। आलोचकों ने जोर दिया कि उनके योगदान को कम नहीं आंका जाना चाहिए, जबकि अन्य ने संतुलित ऐतिहासिक प्रस्तुति की वकालत की, जिससे लंबी बहसें हुईं।
महात्मा गांधी की हत्या से जुड़ा विवाद

महात्मा गांधी की हत्या और उससे संबंधित संगठनों के बारे में राजनीतिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में संशोधन किया गया। विपक्षी दलों और शिक्षाविदों ने दावा किया कि ये संशोधन ऐतिहासिक तथ्यों को विकृत कर सकते हैं। एनसीईआरटी ने स्पष्ट किया कि इन संशोधनों का उद्देश्य भाषा को सरल और संक्षिप्त करना था, न कि तथ्यों को हटाना।
कोविड-19 के दौरान पाठ्यक्रम में कमी
कोविड-19 महामारी के दौरान, एनसीईआरटी ने लोकतंत्र, नागरिक अधिकार आंदोलन, कृषि आंदोलन और पर्यावरण से संबंधित अध्यायों को छोटा कर दिया। कुछ लोगों ने इसे आवश्यक बताया, जबकि अन्य ने संवेदनशील मुद्दों को जानबूझकर छोड़ने का आरोप लगाया। एनसीईआरटी ने स्पष्ट किया कि यह छात्रों पर शैक्षणिक बोझ कम करने के लिए एक अस्थायी उपाय था।
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