बांग्लादेश में जिहादी अत्याचार के बीच डरावने खुलासे, हर दिन 40 से ज़्यादा लोग कर रहे आत्महत्या

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Bangladesh Suicide Rates: बांग्लादेश अशांत दौर से गुजर रहा है। उथल-पुथल मची हुई है। इस बीच एक रिपोर्ट सामने आई है जो आम लोगों की बदहाल मानसिक स्थिति की कहानी कहती है। मंगलवार को स्थानीय मीडिया ने इसे प्रकाशित किया। आंकड़े बताते हैं कि बांग्लादेश में आत्महत्या दर बढ़ी है। देश में हर रोज करीब 40 लोग अपनी जान दे रहे हैं। सोमवार को बांग्लादेश पुलिस (अपराध) के अतिरिक्त महानिरीक्षक, मोहम्मद अशरफुल इस्लाम ने ढाका में इंटरनेशनल सेंटर फॉर डायरियल डिजीज रिसर्च (आईसीडीडीआरबी) के एक कार्यक्रम में इसकी जानकारी दी। Bangladesh News: जशोर जिले में सबसे अधिक आत्महत्या वरिष्ठ पुलिस…

Bangladesh Suicide Rates: बांग्लादेश अशांत दौर से गुजर रहा है। उथल-पुथल मची हुई है। इस बीच एक रिपोर्ट सामने आई है जो आम लोगों की बदहाल मानसिक स्थिति की कहानी कहती है। मंगलवार को स्थानीय मीडिया ने इसे प्रकाशित किया। आंकड़े बताते हैं कि बांग्लादेश में आत्महत्या दर बढ़ी है। देश में हर रोज करीब 40 लोग अपनी जान दे रहे हैं। सोमवार को बांग्लादेश पुलिस (अपराध) के अतिरिक्त महानिरीक्षक, मोहम्मद अशरफुल इस्लाम ने ढाका में इंटरनेशनल सेंटर फॉर डायरियल डिजीज रिसर्च (आईसीडीडीआरबी) के एक कार्यक्रम में इसकी जानकारी दी।

Bangladesh News: जशोर जिले में सबसे अधिक आत्महत्या

Bangladesh Suicide Rates
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वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, सबसे ज्यादा आत्महत्या जशोर जिले में रिपोर्ट हुईं। बांग्लादेश के प्रमुख दैनिक प्रोथोम आलो ने बताया कि आईसीडीडीआरबी, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस), और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने संयुक्त रूप से इस कार्यक्रम को आयोजित किया था, जहां बांग्लादेश राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम योजना के मसौदे की चर्चा पर ध्यान केंद्रित किया गया।

WHO रिपोर्ट से हुए खुलासे

पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स और शोधकर्ता ज्यादातर डब्ल्यूएचओ द्वारा प्रदान किए गए आत्महत्या से संबंधित डेटा पर निर्भर करते हैं। कार्यक्रम में कई वक्ताओं ने कहा कि इस मुद्दे पर बढ़ती चर्चा के बावजूद, देश में सार्थक रोकथाम प्रयासों की कमी है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के निदेशक महबूबर रहमान ने कहा कि आत्महत्या को रोकने के प्रयास मिलजुलकर ही संभव है।

Bangladesh Violence: कार्रवाई की जरूरत

उन्होंने स्वास्थ्य, कृषि, गृह मामलों, शिक्षा, धार्मिक मामलों और सूचना मंत्रालयों के साथ-साथ अन्य हितधारकों सहित कई मंत्रालयों में समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। पुलिस ने कहा कि देश में आत्महत्या के आंकड़े डब्ल्यूएचओ के अनुमानों से ज्यादा हैं। उन्होंने आत्महत्या से संबंधित अप्राकृतिक मौतों के कानून प्रवर्तन एजेंसियों के रिकॉर्ड का हवाला दिया। एडिशनल इंस्पेक्टर जनरल अशरफुल इस्लाम ने 2020 से 2024 तक और इस साल जनवरी से अक्टूबर तक “आत्महत्या से संबंधित अप्राकृतिक मौतों” पर देशव्यापी डेटा प्रदान किया।

2020 और 2024 के बीच 73,597 लोगों ने की आत्महत्या

आकंड़ों के अनुसार, 2020 और 2024 के बीच देश में 73,597 लोगों ने आत्महत्या की। यानी सालाना औसतन 14,719 आत्महत्याएं, या लगभग 40 आत्महत्याएं प्रतिदिन। इस बीच, जनवरी से अक्टूबर 2025 तक कुल 12,335 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए, जिसमें दैनिक औसत लगभग 41 रहा—जो पिछले वर्षों की तुलना में थोड़ा अधिक है।

Bangladesh Suicide Rates: फांसी लगाने वालों की संख्या सबसे अधिक

पुलिस रिकॉर्ड आत्महत्या के तरीकों को कई श्रेणियों में वर्गीकृत करते हैं, जिसमें फांसी लगाना, जहर खाना, आत्मदाह, ट्रेन के सामने कूदना और अन्य तरीके शामिल हैं। रिपोर्ट बताती है कि इसमें फांसी लगाने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है, इसके बाद जहरीला पदार्थ खाने वालों का नंबर आता है। बांग्लादेश के 64 जिलों में से, जशोर में आत्महत्या से जुड़ी अप्राकृतिक मौतों के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। अक्टूबर 2022 और अक्टूबर 2025 के बीच 1,454 मामले दर्ज किए गए। ढाका 1,402 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि इसी अवधि में कुमिल्ला में 1,288 मामले दर्ज किए गए।

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Shivangi Shandilya

शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।