दाऊजी का हुरंगा 2026: 5 मार्च को बरसेगा रंग और कोड़े, जानें दाऊजी मंदिर की अनोखी होली का समय

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Dauji Ka Huranga 2026: होली भारत के सबसे लोकप्रिय और आनंदमय त्योहारों में से एक है, जिसकी शुरुआत देशभर में उत्साह और रंगों के साथ हो चुकी है। हालांकि, जब होली की बात होती है तो ब्रज क्षेत्र का नाम अपने आप जुड़ जाता है। ब्रज में होली सिर्फ एक दिन का त्योहार नहीं बल्कि लगभग 40 दिनों तक चलने वाला सांस्कृतिक महोत्सव है। यहां अलग-अलग मंदिरों और स्थानों पर अनोखी परंपराओं के साथ होली मनाई जाती है, जो देश-विदेश के लोगों को आकर्षित करती है। Dauji Ka Huranga 2026: ब्रज की विशेष होली परंपरा ब्रज की होली अपनी पारंपरिक…

Dauji Ka Huranga 2026: होली भारत के सबसे लोकप्रिय और आनंदमय त्योहारों में से एक है, जिसकी शुरुआत देशभर में उत्साह और रंगों के साथ हो चुकी है। हालांकि, जब होली की बात होती है तो ब्रज क्षेत्र का नाम अपने आप जुड़ जाता है। ब्रज में होली सिर्फ एक दिन का त्योहार नहीं बल्कि लगभग 40 दिनों तक चलने वाला सांस्कृतिक महोत्सव है। यहां अलग-अलग मंदिरों और स्थानों पर अनोखी परंपराओं के साथ होली मनाई जाती है, जो देश-विदेश के लोगों को आकर्षित करती है।

Dauji Ka Huranga 2026: ब्रज की विशेष होली परंपरा

Dauji Ka Huranga 2026 (image-social media )
Dauji Ka Huranga 2026 (image-social media )

ब्रज की होली अपनी पारंपरिक शैली, धार्मिक महत्व और लोक संस्कृति के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां हर मंदिर में होली मनाने का तरीका अलग होता है। कहीं फूलों की होली खेली जाती है तो कहीं लठमार होली का आयोजन होता है। इन्हीं खास परंपराओं में मथुरा जिले के बलदेव कस्बे में स्थित दाऊजी महाराज मंदिर की “हुरंगा होली” विशेष पहचान रखती है।

Dauji Huranga Holi on 5 March: कब मनाया जाएगा दाऊजी का हुरंगा 2026?

Dauji Ka Huranga 2026 (image-social media )
Dauji Ka Huranga 2026 (image-social media )

इस वर्ष दाऊजी का प्रसिद्ध हुरंगा उत्सव 5 मार्च 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा। यह आयोजन होली के अगले दिन होता है। हर साल इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में उत्सव के दौरान भक्ति, संगीत, रंग और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

Dauji Maharaj mandir Huranga Holi: हुरंगा होली की अनोखी परंपरा

Dauji Ka Huranga 2026 (image-social media )
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दाऊजी महाराज मंदिर की हुरंगा होली अपनी अलग शैली के कारण बेहद खास मानी जाती है। इस उत्सव में महिलाएं और पुरुष पारंपरिक तरीके से होली खेलते हैं। महिलाएं हुरियारों यानी पुरुषों के कपड़े फाड़कर उनसे कोड़े बनाती हैं और फिर प्रतीकात्मक रूप से उन्हें मारती हैं। यह परंपरा हास्य, प्रेम और लोक संस्कृति का प्रतीक मानी जाती है। इस दौरान मंदिर परिसर में रंग, गुलाल और टेसू (पलाश) के फूलों से बने प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। पारंपरिक ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्सवमय हो जाता है।

Braj ki Holi: कोड़ेमार होली का विशेष आकर्षण

दाऊजी का हुरंगा “कोड़ेमार होली” के नाम से भी प्रसिद्ध है। इस आयोजन में सखियां पुरुषों पर प्रतीकात्मक रूप से कोड़े बरसाती हैं, जिसे देखने के लिए हजारों लोग जुटते हैं। 5 मार्च को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक यह आयोजन बड़े उत्साह और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाएगा। यह दृश्य ब्रज संस्कृति की जीवंत झलक पेश करता है।

भगवान बलराम को समर्पित प्राचीन मंदिर

बलदेव में स्थित दाऊजी महाराज मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम को समर्पित है। यह मंदिर अत्यंत प्राचीन और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां लगभग 7 फीट ऊंची भगवान बलराम की काले पत्थर की प्रतिमा स्थापित है, जिनके साथ उनकी पत्नी रेवती जी भी विराजमान हैं। मंदिर को “गोपाल लालजी मंदिर” और “बलभद्र कुंड” के कारण भी जाना जाता है।

ब्रज का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्र

मथुरा शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर ब्रज क्षेत्र के प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। होली के समय यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती है। खास बात यह है कि जब देश के अधिकांश हिस्सों में होली समाप्त हो जाती है, तब ब्रज में दाऊजी का हुरंगा उत्सव रंगों की अंतिम और सबसे अनोखी झलक पेश करता है। दाऊजी का हुरंगा सिर्फ रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि भाईचारे, प्रेम, परंपरा और ब्रज की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है, जो हर वर्ष लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।