मेरठ में जाट संसद की बैठक में 11 प्रस्ताव पारित, सातवें में अंतरजातीय विवाह को रोकने की बात, जानिए और क्या हैं प्रस्ताव

International Jat Parliament in Meerut

International Jat Parliament in Meerut : उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले की सरधना तहसील के सकौती टांडा कस्बे में रविवार को महाराजा सूरजमल की प्रदेश की सबसे बड़ी प्रतिमा का अनावरण किया गया। यह प्रतिमा अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद की ओर से स्थापित की गई है। इस अवसर पर जाट समाज की एक अहम बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें समाज से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान जाट नेतृत्व ने सर्वसम्मति से 11 महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए।

युवाओं को इतिहास से जोड़ने पर जोर

बैठक में पहला प्रस्ताव जाट युवाओं को अपने इतिहास और महापुरुषों से जोड़ने को लेकर रखा गया। इसमें युवाओं को जाट महापुरुषों के जीवन और योगदान के बारे में पढ़ने तथा उनकी जयंती और पुण्यतिथि मनाने के लिए प्रेरित करने की बात कही गई।

दूसरे प्रस्ताव में युवाओं को तकनीकी और स्किल आधारित शिक्षा प्राप्त करने के साथ उच्च शिक्षा की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। साथ ही स्वरोजगार और व्यापार के क्षेत्र में आगे आने की अपील भी की गई।

सर छोटूराम को भारत रत्न देने की मांग

तीसरे प्रस्ताव में दीनबंधु और रहबरे आजम के नाम से प्रसिद्ध सर चौधरी छोटूराम को भारत रत्न देने की मांग उठाई गई। चौथे प्रस्ताव में जाट समाज को नशामुक्त बनाने के लिए अभियान चलाने और युवाओं के बीच जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया गया।

पांचवें प्रस्ताव में अंतरजातीय विवाह को रोकने की बात कही गई, जबकि छठे प्रस्ताव में उच्च पदों पर कार्यरत जाट नेताओं और अधिकारियों से समाज के लोगों की निस्वार्थ मदद करने की अपील की गई।

जाट एकता मजबूत करने की अपील

सातवें प्रस्ताव में क्षेत्रवाद और गोत्रवाद से ऊपर उठकर वैश्विक स्तर पर जाट समाज की एकता को मजबूत करने का आह्वान किया गया। आठवें प्रस्ताव में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली सहित उन राज्यों में जाटों को ओबीसी आरक्षण दिलाने के लिए प्रयास तेज करने की बात कही गई, जहां अभी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। नौवें प्रस्ताव के तहत जाट महापुरुषों के इतिहास को सीबीएसई, एनसीईआरटी और अन्य राज्य व केंद्रीय पाठ्यक्रमों में शामिल करने की मांग रखी गई।

शादी की उम्र बढ़ाने की सलाह

दसवें प्रस्ताव में समाज के युवाओं के लिए विवाह की उम्र बढ़ाने की सलाह दी गई। इसके अनुसार लड़के और लड़कियों की शादी 23 से 25 वर्ष की आयु के बीच करने का सुझाव दिया गया।

ग्यारहवें और अंतिम प्रस्ताव में 36 बिरादरियों के साथ सामाजिक भाईचारा बढ़ाने, जाट युवाओं में सकारात्मक सोच विकसित करने और किसी भी अन्य समाज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी न करने का संकल्प लिया गया।

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