Lucknow Sister Suicide Case: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र से एक बेहद दुखद और संवेदनशील घटना सामने आई है। गुरुवार को यहां रहने वाली दो सगी बहनों ने फिनायल पीकर सुसाइड कर लिया। इस घटना से पूरे इलाके में शोक और हैरानी का माहौल है। परिजनों और पड़ोसियों के अनुसार, दोनों बहनें काफी समय से मानसिक तनाव में थीं।
Lucknow Sister Suicide Case: पालतू कुत्ते से गहरा लगाव बना तनाव की वजह
बताया जा रहा है कि दोनों बहनों को अपने पालतू जर्मन शेफर्ड कुत्ते से बहुत लगाव था। कुत्ते की तबीयत लंबे समय से खराब चल रही थी, जिससे वे लगातार परेशान रहने लगी थीं। जैसे-जैसे कुत्ते की हालत बिगड़ती गई, दोनों बहनें चुपचाप रहने लगीं और किसी से ज्यादा बातचीत भी नहीं करती थीं। परिवार के लोगों का कहना है कि कुत्ते की बीमारी का असर उनकी मानसिक स्थिति पर साफ दिखाई देने लगा था।

Lucknow Suicide News: खुदकुशी का किया फैसला
वे अक्सर उदास रहती थीं और रोजमर्रा की गतिविधियों में भी रुचि कम हो गई थी। इस दौरान कुत्ते ही तबीयत सही न होने पर दोनों सगी बहनें राधा और जिया ने खुदकुशी का फैसला किया और एक साथ फिनायल पी लिया. ऐसे में परिजन उन्हें तुरंत रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल लेकर निकले। दुर्भाग्य से रास्ते में ही एक बहन की मौत हो गई, जबकि दूसरी ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। शाम को दोनों का अंतिम संस्कार एक साथ किया गया।
Sisters Suicide News: झाड़-फूंक के चक्कर में उलझा परिवार
पड़ोसियों के मुताबिक, दोनों बहनें अपने पालतू कुत्ते से इतना जुड़ी हुई थीं कि अगर वह खाना नहीं खाता था, तो वे भी भोजन नहीं करती थीं। कुत्ते के बीमार पड़ने के बाद यह स्थिति और गंभीर हो गई। धीरे-धीरे उनका तनाव बढ़ता चला गया। स्थानीय लोगों ने मीडिया को बताया कि जब दोनों बहनों की मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी, तो परिवार ने इसे मानसिक बीमारी मानने के बजाय किसी ऊपरी प्रभाव से जोड़ दिया। इसी वजह से इलाज की जगह झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र का सहारा लिया गया। परिवार कई बार उन्हें धार्मिक स्थलों पर भी ले गया, लेकिन इससे कोई सुधार नहीं हुआ।

पुलिस जांच में जुटी
इस पूरे मामले पर पारा थाना प्रभारी सुरेश सिंह ने बताया कि दोनों शवों का पोस्टमॉर्टम कराया गया है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल मौत के कारणों की जांच जारी है और परिवार के बयान दर्ज किए गए हैं।
यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि मानसिक स्वास्थ्य को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर सही इलाज, डॉक्टर की सलाह और भावनात्मक सहारा कई जिंदगियों को बचा सकता है। किसी भी तरह की परेशानी या तनाव की स्थिति में विशेषज्ञों से मदद लेना बेहद जरूरी है।
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