Businessman Fined in Mumbai: मुंबई की एक कोर्ट ने एक बिजनेसमैन को कबूतरों को दाना खिलाने के मामले में दोषी ठहराया है। यह घटना शहर के माहिम इलाके की है, जहां सार्वजनिक स्थान पर कबूतरों को दाना डालने के कारण व्यक्ति पर कार्रवाई की गई। कोर्ट ने इस मामले में 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
मुंबई के कई इलाकों में कबूतरों को दाना खिलाने पर पहले से ही रोक लगी हुई है। प्रशासन और कोर्ट का मानना है कि इससे लोगों की सेहत को नुकसान हो सकता है। कबूतरों की बीट और उनके आसपास की गंदगी से कई गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा रहता है। ऐसे में सार्वजनिक जगहों पर दाना डालना स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा करता है।
Businessman Fined in Mumbai: कौन है आरोपी?
इस मामले में दादर निवासी नितिन सेठ को आरोपी बनाया गया था। नितिन पेशे से बिजनेसमैन हैं। उन्हें 1 अगस्त 2025 को माहिम इलाके में कबूतरों को दाना खिलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जिस कबूतरखाने के आसपास यह घटना हुई, वह अब बंद हो चुका है।
Feeding Pigeons Case: मामला कोर्ट तक कैसे पहुंचा?
कबूतरों को दाना डालने की यह घटना स्थानीय नियमों के उल्लंघन से जुड़ी थी। पुलिस ने मामले की जांच के बाद इसे अदालत में पेश किया। सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने सरकारी आदेश के बावजूद कबूतरों को दाना खिलाया था, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा हो सकता था।

Pigeon Feeding Ban Mumbai: कोर्ट का फैसला
बांद्रा स्थित अदालत में एडिशनल चीफ जस्टिस मजिस्ट्रेट वी. यू. मिसल ने मामले की सुनवाई की। नितिन सेठ ने अपने ऊपर लगे आरोप स्वीकार कर लिए और अदालत से नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि उनसे गलती हो गई है। कोर्ट ने आरोपी की बात सुनने के बाद उसे दोषी ठहराया, लेकिन सजा के तौर पर केवल 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने माना कि यह कृत्य लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
Mumbai News: किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला ?
नितिन सेठ पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 (ख) के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह धारा मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरे में डालने और सरकारी आदेश का उल्लंघन करने से जुड़ी है। इसके अलावा, बीएनएस की धारा 271 के तहत भी आरोप लगाया गया, जो ऐसे लापरवाहीपूर्ण कामों से संबंधित है जिनसे गंभीर बीमारी फैलने की आशंका हो।

कोर्ट ने क्या कहा?
इस फैसले से साफ है कि अदालत और प्रशासन सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर हैं। कबूतरों को दाना खिलाना भले ही कई लोगों को धार्मिक या भावनात्मक रूप से सही लगे, लेकिन अगर इससे समाज की सेहत पर असर पड़ता है तो यह कानूनन गलत माना जाएगा। यह मामला लोगों के लिए चेतावनी है कि वे नियमों का पालन करें और सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे काम न करें, जिनसे दूसरों को नुकसान पहुंच सकता है।
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