PM ओली की जान के दुश्मन क्यों बने नेपाल के युवा, प्रदर्शन में लगे भ्रष्टाचार के पोस्टर, क्या है अंदर की बात

Nepal Curfew Explainer

Nepal Curfew Explainer: नेपाल में युवाओं ने सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया है। नेपाल के जेन-जी युवाओं ने प्रधानमंत्री ओली के खिलाफ बगावत कर दी है। नेपाल में 26 सोशल मीडिया ऐप्स पर बैन लगाए जाने के बाद हजारों युवा सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे  सोशल मीडिया पर बैन लगाए जाने के बाद युवाओं में आक्रोश है। प्रदर्शन इतना भड़क गया है कि प्रदर्शनकारियों का एक जत्था संसद के अंदर घुस गया है। इसके बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

Kathmandu Curfew: काठमांडू में लगा कर्फ्यू

 

काठमांडू में कर्फ्यू के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इसके तहत चार जिलों में किसी के भी प्रवेश या निकास, किसी भी प्रकार की सभा, जुलूस, प्रदर्शन या बैठक पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। बता दें इस विरोध प्रदर्शन में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 80 लोग घायल हो गए।

Nepal Curfew Explainer: क्या है पूरा मामला

नेपाल में सरकार के खिलाफ युवाओं का प्रदर्शन इतना साफ नहीं जितना ऊपर से दिख रहा है। इस प्रदर्शन के तार कई जगहों पर जाकर जुड़ते हैं। युवाओं के प्रदर्शन में जो पोस्टर लगाए गए, उनमें ओली सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ पोस्टर देखने को मिले। अब सवाल ये है कि सोशल मीडिया पर बैन के विरोध में भ्रष्टाचार के आरोप क्यों लग रहे हैं।

Nepal Protest: पीएम पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप

आपको बता दें, इस प्रदर्शन में एक चेहरा हिंदू नेता दुर्गा प्रसाई भी हैं, जो मुखर रूप से पीएम ओली का विरोध करते आए हैं। जून 2025 में दुर्गा प्रसाई काठमांडू में लोकतंत्र हटाने और राजतंत्र लाने के लिए प्रदर्शन कर चुके हैं, जिसके बाद उन्हें राजद्रोह का आरोप में हिरासत में रखा गया। वे हाल ही में जमानत पर बाहर आए हैं।  इसके अलावा यह भी खबरे हैं कि ओली सरकार की पार्टी में अंदरूनी कलह भी चल रहा है और उनकी सहयोगी नेपाली कांग्रेस पार्टी उनसे उखड़ी हुई है। ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि इस प्रदर्शन के पीछे तख्तापलट की साजिश भी हो सकती है।

Nepal Social Media Ban: क्यों बैन किए गए 26 ऐप्स

नेपाल सरकार ने सोशल मीडिया को बैन करने का फैसला इसलिए लिया क्योंकि सभी  प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों ने सात दिनों की निर्धारित समय सीमा के अंदर सरकार के पास पंजीकरण नहीं करवाया। दरअसल, नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने अदालत की अवमानना ​​के एक मामले में सरकार को आदेश दिया था कि देश में चल रहे सभी घरेलू और विदेशी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का अनिवार्य रूप से पंजीकरण और निगरानी की जाए। सोशल मीडिया कंपनियों ने पंजीकरण नहीं करवाया, जिसके बाद इन्हें बैन कर दिया गया।

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