New COVID variant hits US : मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिका में एक बार फिर कोविड-19 को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। हाल ही में कोविड का एक नया वेरिएंट BA.3.2 सामने आया है, जिसे “Cicada” नाम दिया गया है। यह नाम एक कीड़े पर आधारित है। यह नया वेरिएंट SARS-CoV-2 वायरस का एक अलग प्रकार है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह पहले के वेरिएंट्स से काफी अलग है और इसकी जेनेटिक संरचना भी बदल चुकी है। BA.3.2 दरअसल पुराने BA.3 वेरिएंट से जुड़ा है, जो 2022 के बाद लगभग खत्म हो गया था। अब इतने समय बाद इसकी वापसी ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है।
New COVID Variant Hits US : 70 से ज्यादा म्यूटेशन, क्यों है खतरनाक?

- एक्स्पर्ट्स के मुताबिक, इस वेरिएंट में 70 से 75 तक म्यूटेशन (बदलाव) पाए गए हैं, खासकर इसके स्पाइक प्रोटीन में।
- यही स्पाइक प्रोटीन वायरस को मानव शरीर की कोशिकाओं में घुसने में मदद करता है।
- इन बदलावों के कारण यह वेरिएंट “इम्यून एस्केप” यानी शरीर की पहले से बनी प्रतिरोधक क्षमता (वैक्सीन या पुराने संक्रमण से) को चकमा देने में सक्षम हो सकता है।
- यही वजह है कि इसे लेकर स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
कितने देशों में फैल चुका है?
- Centers for Disease Control and Prevention (CDC) के अनुसार, अमेरिका के कम से कम 25 राज्यों में इस वेरिएंट के संकेत मिल चुके हैं।
- यह वेस्टवॉटर (सीवेज) सैंपल, यात्रियों के टेस्ट और मरीजों के क्लिनिकल सैंपल में पाया गया है, जिससे इसके तेजी से फैलने की संभावना जताई जा रही है।
- CDC की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 11 फरवरी तक 23 देशों में इस वेरिएंट की पुष्टि हो चुकी थी।
- इसके अलावा जापान, जर्मनी, केन्या, डेनमार्क, नीदरलैंड और ब्रिटेन जैसे देशों में भी इसके मामले सामने आए हैं।
- वहीं यूरोप के कुछ हिस्सों में यह वेरिएंट तेजी से फैल रहा है।
- रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ देशों में कुल कोविड मामलों में लगभग 30% तक हिस्सेदारी इसी वेरिएंट की हो सकती है।
- इससे यह साफ है कि यह वेरिएंट धीरे-धीरे अपना प्रभाव बढ़ा रहा है।
WHO ने क्या कहा?
World Health Organization (WHO) ने BA.3.2 को “वेरिएंट अंडर मॉनिटरिंग” की श्रेणी में रखा है। इसका मतलब है कि अभी इसे बहुत खतरनाक घोषित नहीं किया गया है, लेकिन इसकी गतिविधियों और प्रभाव पर नजर रखी जा रही है।
JN.1 से अलग क्यों है?
यह वेरिएंट हाल ही में फैले JN.1 वंश से जुड़ा नहीं है। वैज्ञानिकों का कहना है कि BA.3.2 एक अलग जेनेटिक लाइन से आता है, जिससे इसकी प्रकृति और व्यवहार अलग हो सकता है। यही वजह है कि इसके प्रभाव को लेकर अभी और रिसर्च की जरूरत है।
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