Shankaracharya Appointment Controversy: प्रयागराज मेला प्राधिकरण के नोटिस के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से आठ पन्नों का प्रतिवाद भेजा गया है। अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने वकील के जरिए भेजे गए जवाब में मेला प्राधिकरण के आरोपों को नकारा है और नोटिस के वापस लेने की मांग की है। उन्होंने मनमाना और भेदभावपूर्ण व्यवहार किए जाने का भी आरोप लगाया है।
Magh mela 2026: वकील ने मेला प्राधिकरण को दिया जवाब

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के वकील ने 15 बिंदुओं में प्रयागराज मेला प्राधिकरण को जवाब दिया है। उन्होंने लिखा, “सोमवार को आपकी (मेला प्राधिकरण) ओर से नोटिस सम्मानित अविमुक्तेश्वरानंद को बदनाम और अपमानित करने के बुरे इरादे से जारी किया गया, जो मनमाना, द्वेषपूर्ण और भेदभावपूर्ण है।”
शारदामठ द्वारका के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज की वसीयत का भी जिक्र किया गया है। इसके आधार पर वकील ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शंकराचार्य होने को लेकर उठे सवालों का जवाब दिया।
Jyotish Peeth Shankaracharya: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का शंकराचार्य पद पर पट्टाभिषेक

उन्होंने अपने जवाब में लिखा, “एक जुलाई 2021 को एक घोषणा पत्र में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को ज्योतिष्पीठ ज्योतिर्मठ का जगद्गुरु शंकराचार्य नियुक्त किया गया। 12 अक्टूबर 2022 को ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य की वसीयत और घोषणा का पालन करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को श्री सुबुद्धानंद ब्रह्मचारी की ओर से ज्योतिष्पीठ ज्योतिर्मठ के जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से नियुक्त और स्थापित किया गया, जो निर्धारित वेद मंत्रों के जाप के बीच लाखों लोगों की उपस्थिति में परमहांसी गंगा आश्रम में हुआ।”
Shankaracharya Controversy: शंकराचार्य की उपाधि
उन्होंने लिखा, “ये झूठे आरोप फैलाए जा रहे हैं कि अविमुक्तेश्वरानंद को जगतगुरु शंकराचार्य की उपाधि का उपयोग करने का अधिकार नहीं है, जिससे अधिकारियों और आम जनता के बीच अविमुक्तेश्वरानंद की ज्योतिषपीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में नियुक्ति की वैधता के बारे में भ्रम पैदा हो गया है। मेला प्राधिकरण के नोटिस के कारण अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को गंभीर वित्तीय, सामाजिक और प्रतिष्ठा संबंधी नुकसान हुआ है, जिससे उनकी गरिमा, सम्मान और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े वित्तीय मामलों पर असर पड़ा है।”
Prayagraj News: नोटिस को वापस लेने का अनुरोध

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से अनुरोध किया गया है कि सोमवार को जारी नोटिस को वापस लिया जाए। इसके साथ ही, कहा गया है कि जगद्गुरु शंकराचार्य संस्थान और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बदनाम और अपमानित करने के लिए जिम्मेदार सभी अन्य लोगों के खिलाफ उचित या कोई भी कानूनी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।


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