Sidhouli Dharma Yatra: सिधौली/सीतापुर। गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के उद्देश्य से निकाली जा रही गौ प्रतिष्ठा धर्म युद्ध यात्रा के अंतर्गत जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती सिधौली कस्बा स्थित सिद्धेश्वर मंदिर पहुंचे। यहां पहुंचकर उन्होंने भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और देश में गौ संरक्षण एवं गौसेवा के महत्व पर प्रकाश डाला।
गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने की मुहिम तेज
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि भारत की सनातन परंपरा में गौमाता का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। गौमाता केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कृषि और स्वास्थ्य की आधारशिला है। इसी उद्देश्य से पूरे देश में गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए धर्म सम्राट करपात्री जी द्वारा चलाए गए अभियान का अगला चरण है , गौ भक्तों द्वारा धर्म युद्ध यात्रा निकाली जा रही है, जिससे समाज में गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।
UP News: गोबर से बने श्रीयंत्र और आदि योगी प्रतिमा ने खींचा ध्यान
इस अवसर पर स्वदेशी गोविज्ञान अनुसंधान केन्द्र ट्रस्ट / कामधेनु फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष मदन पाल सिंह अर्कवंशी ने स्वामी जी को गौमाता के गोबर से निर्मित विभिन्न गौ उत्पाद भेंट किए। इनमें आदि योगी की प्रतिमा, श्रीयंत्र, मोबाइल स्टैंड, एंटी रेडिएशन चिप, दीपक, धूपबत्ती स्टैंड तथा भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा शामिल थीं। इन उत्पादों को देखकर स्वामी जी ने संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए आशीर्वाद प्रदान किया।
Sidhouli Dharma Yatra: गौसेवा से प्राप्त होते हैं धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष
इस दौरान मदन पाल सिंह अर्कवंशी ने कहा कि आजकल लोग गौमाता को अनुपयोगी समझकर सड़कों पर भटकने के लिए छोड़ देते हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि गौमाता पृथ्वी पर एकमात्र ऐसा प्राणी है जिसकी सेवा से मनुष्य को चारों पुरुषार्थ—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—की प्राप्ति हो सकती है। इसलिए गौसेवा ही गोविंद की सच्ची सेवा है। इस दौरान स्वदेशी गोविज्ञान अनुसंधान केन्द्र ट्रस्ट/ कामधेनु फाउंडेशन के उपाध्यक्ष श्रीपति मिश्र, प्रशांत तिवारी, अनिल मिश्रा, बच्चे बाजपेई, , गोपाली शुक्ला, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं क्षेत्रीय लोग उपस्थित रहे।


Download Android App
Download iOS App






