कल Guru Purnima पर अपने गुरुओं को करें नमन, जानें इस खास मौके पर क्या करें और क्या न करें

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Guru Purnima: आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि गुरुवार को पड़ रही है, इस दिन शिष्य अपने गुरु और मार्गदर्शक की पूजा करते हैं, जिनसे उन्हें शैक्षिक और आध्यात्मिक ज्ञान मिला है। शास्त्रों में गुरु का स्थान देवताओं से भी ऊपर बताया गया है, क्योंकि गुरु अपने शिष्य को जीवन में सफलता पाने का और परमात्मा की प्राप्ति का मार्ग बताते हैं। गुरु पूर्णिमाः अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले जाने वाले गुरुओं को नमन जानें इस श्लोक का अर्थ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः। इस श्लोक का अर्थ है कि गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु…

Guru Purnima: आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि गुरुवार को पड़ रही है, इस दिन शिष्य अपने गुरु और मार्गदर्शक की पूजा करते हैं, जिनसे उन्हें शैक्षिक और आध्यात्मिक ज्ञान मिला है। शास्त्रों में गुरु का स्थान देवताओं से भी ऊपर बताया गया है, क्योंकि गुरु अपने शिष्य को जीवन में सफलता पाने का और परमात्मा की प्राप्ति का मार्ग बताते हैं। गुरु पूर्णिमाः अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले जाने वाले गुरुओं को नमन

जानें इस श्लोक का अर्थ

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः। इस श्लोक का अर्थ है कि गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं. गुरु ही शिव हैं। गुरु साक्षात परब्रह्म हैं. गुरु को हम प्रणाम करते हैं। गुरु शब्द में गु’ का अर्थ है अंधकार और ‘रु’ का अर्थ है नाश करने वाला, यानी जो अज्ञान के अंधकार का नाश करता है और ज्ञान का प्रकाश देता है, वही गुरु है।

आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा क्यों है खास?

आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। इसलिए हर साल इस दिन को गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) के रूप में मनाते हैं। उन्होंने वेदों का संपादन किया, 18 पुराण, महाभारत और श्रीमद् भगवद् गीता की रचना की। गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं।

इस दिन यह कार्य जरूर करें

इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से आपको हर तरह के पाप से मुक्ति मिलती है और महापुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन गुरुओं का सम्मान करने के साथ-साथ उन्हें गुरु दक्षिणा भी दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन गुरु और बड़ों का सम्मान करना चाहिए। जीवन में मार्गदर्शन के लिए उनका आभार व्यक्त करना चाहिए, गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) पर व्रत, दान और पूजा का भी महत्व है। व्रत रखने और दान करने से ज्ञान मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

गुरु पूर्णिमा किस लिए है ख़ास

गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) का पर्व गुरु-शिष्य परंपरा का प्रतीक है। इस दिन गुरु की पूजा करनी चाहिए, लेकिन अगर हम गुरु से साक्षात् नहीं मिल पा रहे हैं तो गुरु का ध्यान करते हुए भी पूजा कर सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार गुरु की मानसिक पूजा का भी की जा सकती है। इसी तरह हम भी जब कोई बड़ा काम शुरू करते हैं तो अपने गुरु का ध्यान जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से काम में सफलता मिलती है।

गुरुओं को भेंट करें इस रंग के कपड़े

इस दिन (Guru Purnima) व्रत रखने के साथ-साथ गुरुओं को पीले वस्त्र, फल और अन्य सामग्री भेट के रूप में दें। साथ ही इस दिन आप गुरु मंत्र का जाप करे। ग्रंथों का पाठ करें, गुरु द्वारा बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लें। इस दिन किसी योग व्यक्ति को गुरु माने और गुरु दीक्षा लें। गुरु को गुरु दक्षिणा अर्पित करें।

 

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Shivangi Shandilya

शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।