UN Secretary-General Election 2026: United Nations (यूएन) में नए महासचिव के चयन की प्रक्रिया अगले महीने से शुरू होने जा रही है। इस अहम पद के लिए अब तक पांच उम्मीदवारों के नाम सामने आए हैं। दुनिया में चल रहे कई बड़े संकटों के बीच यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अगले महासचिव को वैश्विक स्तर पर शांति, विकास और मानवाधिकार से जुड़े कई जटिल मुद्दों से निपटना होगा। संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष Annalena Baerbock ने शुक्रवार को बताया कि महासचिव के चुनाव की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और संतुलित तरीके से कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि हर उम्मीदवार को अपनी योजना और दृष्टि दुनिया के सामने रखने का बराबर अवसर मिलेगा। बेयरबॉक के अनुसार 20 अप्रैल से सभी उम्मीदवारों के साथ संवाद सत्र शुरू होंगे। प्रत्येक उम्मीदवार को करीब तीन घंटे का समय दिया जाएगा, जिसमें वह बताएगा कि वह 193 सदस्य देशों वाले इस वैश्विक संगठन का नेतृत्व किस तरह करना चाहता है।
UN Secretary-General Election 2026: उम्मीदवारों से पूछे जाएंगे कई अहम सवाल

इन संवाद सत्रों में उम्मीदवारों से विभिन्न विषयों पर सवाल भी पूछे जाएंगे। यह प्रक्रिया केवल सदस्य देशों तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें सिविल सोसायटी संगठनों को भी शामिल किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक विचार सामने आ सकें। पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन लाइव प्रसारित किया जाएगा। इससे दुनियाभर के लोग भी देख सकेंगे कि उम्मीदवार संगठन के भविष्य को लेकर क्या सोच रखते हैं और उनकी प्राथमिकताएं क्या हैं।
UN Secretary-General Election 2026: महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने की कोशिश

संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में अब तक किसी महिला को महासचिव बनने का मौका नहीं मिला है। इसी कारण पिछले वर्ष महासभा की अध्यक्ष और उस समय के सुरक्षा परिषद अध्यक्ष ने अधिक से अधिक महिला उम्मीदवारों को सामने आने की अपील की थी। इस पहल का उद्देश्य संगठन के नेतृत्व में लैंगिक संतुलन को बढ़ावा देना है। महासभा के प्रस्ताव में भी यह कहा गया है कि चुनाव प्रक्रिया में महिला उम्मीदवारों को प्रोत्साहित करना एक महत्वपूर्ण लक्ष्य होना चाहिए। हालांकि अभी तक सामने आए पांच उम्मीदवारों में से तीन महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं।
तीन महिला उम्मीदवारों के नाम
महासचिव पद की दौड़ में शामिल महिला उम्मीदवारों में सबसे प्रमुख नाम चिली की पूर्व राष्ट्रपति Michelle Bachelet का है। बैचेलेट पहले संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त भी रह चुकी हैं और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उनका लंबा अनुभव रहा है। उन्हें चिली, ब्राजील और मेक्सिको ने नामित किया है। दूसरी उम्मीदवार कोस्टा रिका की Rebeca Grynspan हैं।
वह इस समय United Nations Conference on Trade and Development (यूएनसीटैड) की महासचिव हैं और अपने देश की पूर्व उपराष्ट्रपति भी रह चुकी हैं। तीसरी महिला उम्मीदवार अर्जेंटीना की Virginia Gamba हैं। उन्हें मालदीव ने नामित किया है। गाम्बा संयुक्त राष्ट्र में कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं और बच्चों तथा सशस्त्र संघर्ष से जुड़े मुद्दों पर महासचिव की विशेष प्रतिनिधि भी रह चुकी हैं।
दो पुरुष उम्मीदवार भी मैदान में
महासचिव पद के लिए दो पुरुष उम्मीदवार भी सामने आए हैं। इनमें अर्जेंटीना के Rafael Grossi शामिल हैं, जो इस समय International Atomic Energy Agency (आईएईए) के प्रमुख हैं। उन्हें अर्जेंटीना ने ही नामित किया है। दूसरे उम्मीदवार Macky Sall हैं, जिन्हें बुरुंडी ने नामित किया है। साल पहले सेनेगल के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों पदों पर काम कर चुके हैं और अफ्रीकी राजनीति में एक अनुभवी नेता माने जाते हैं। महासचिव पद के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 1 अप्रैल तय की गई है।
अंतिम फैसला सुरक्षा परिषद की भूमिका से जुड़ा
हालांकि महासभा में महासचिव के चयन के लिए साधारण बहुमत की आवश्यकता होती है, लेकिन वास्तविक फैसला अक्सर United Nations Security Council की सिफारिश पर निर्भर करता है। सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों के पास वीटो की शक्ति होती है। यदि इनमें से कोई देश किसी उम्मीदवार का विरोध करता है, तो उसका चयन मुश्किल हो सकता है।
नए महासचिव से क्या अपेक्षाएं
बेयरबॉक ने बताया कि उम्मीदवारों के साथ होने वाले संवाद का पहला भाग उनके नेतृत्व कौशल और प्रशासनिक अनुभव पर केंद्रित होगा। दूसरे भाग में संयुक्त राष्ट्र के तीन प्रमुख स्तंभों, शांति और सुरक्षा, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन, तथा मानवाधिकार पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगले महासचिव में मजबूत नेतृत्व क्षमता और बेहतर प्रबंधन कौशल होना जरूरी है, ताकि संगठन को बदलते वैश्विक हालात के अनुसार आगे बढ़ाया जा सके। मौजूदा महासचिव António Guterres इस वर्ष अपना दूसरा कार्यकाल पूरा करने वाले हैं। उनके बाद चुना जाने वाला नया महासचिव ऐसे समय में जिम्मेदारी संभालेगा जब दुनिया कई राजनीतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है।
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