Uttar Pradesh Big News: उत्तर प्रदेश में अफसरों के इस्तीफा देना का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच अब शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणी के विरोध में अयोध्या से एक और अधिकारी ने अपना पद छोड़ दिया है। पद छोड़ने वाले अधिकारी की पहचान राज्यकर विभाग में तैनात जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह के रूप में हुई है। उन्होंने यह इस्तीफा राज्यपाल को भेजा है और इसकी जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी दी है। अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया है कि उन्होंने यह कदम मुख्यमंत्री के समर्थन में और आत्मसम्मान की भावना से उठाया है।
Uttar Pradesh Big News: मुख्यमंत्री योगी के सम्मान में लिया निर्णय
प्रशांत कुमार सिंह ने इस्तीफे में लिखा कि योगी आदित्यनाथ एक लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए मुख्यमंत्री हैं और उनके खिलाफ की गई किसी भी तरह की अपमानजनक टिप्पणी को वह स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि जिस राज्य से उन्हें वेतन मिलता है और जहां वे सेवा कर रहे हैं, उसके नेतृत्व के साथ खड़ा होना उनका कर्तव्य है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री का अपमान पूरे प्रदेश का अपमान है और ऐसे समय में चुप रहना उन्हें उचित नहीं लगा।

Ayodhya News: मानसिक पीड़ा के चलते उठाया कठोर कदम
डिप्टी कमिश्नर ने अपने दो पन्नों के इस्तीफे में यह भी बताया कि शंकराचार्य की टिप्पणी से वह पिछले कुछ दिनों से मानसिक तनाव में थे। इस बयान ने उन्हें अंदर से आहत किया, जिसके चलते उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने साफ कहा कि यह निर्णय किसी दबाव में नहीं लिया गया है, बल्कि यह पूरी तरह उनके आत्मसम्मान और निजी सोच पर आधारित है।
GST Deputy Commissioner Prashant Kumar Singh: 2023 से अयोध्या में थे तैनात
प्रशांत कुमार सिंह की अयोध्या में तैनाती वर्ष 2023 में हुई थी। वह राज्यकर विभाग में संभागीय उप आयुक्त यानी जीएसटी डिप्टी कमिश्नर के पद पर कार्यरत थे। अपने इस्तीफे में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पद छोड़ने के बाद वह समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय रहेंगे और अपने निजी संसाधनों से लोगों की मदद करेंगे। उनके इस फैसले के बाद प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

पहले भी सामने आया था इस्तीफे का मामला
इससे पहले सोमवार को बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी इस्तीफा दिया था। हालांकि, इस्तीफा देने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। उन्होंने जिला प्रशासन और जिलाधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए थे। अलंकार अग्निहोत्री का कहना था कि उन्हें जिलाधिकारी के आवास पर करीब 45 मिनट तक रोके रखा गया और मानसिक दबाव बनाया गया। उन्होंने यह भी कहा था कि वह यूजीसी के नए नियमों और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवादों से आहत थे।
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