Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की सिद्धार्थ विहार योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है। प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, संपत्ति प्रबंधन विभाग और जोनल कार्यालय के कुछ अधिकारियों ने अधूरे टावरों की ही गणना कर दी और निजी बिल्डर को करोड़ों का लाभ पहुंचाया।
पूर्व संपत्ति अधिकारी निपेंद्र बहादुर सिंह की वसुंधरा स्थित कार्यालय में लाखों रुपये के साथ फोटो भी वायरल हुई, जबकि पूर्व जोनल आयुक्त मेरठ की गोपनीय चिट्ठी में अधिकारियों पर निजी बिल्डर को लाभ देने का आरोप लगाया गया है। सूत्रों के अनुसार, यह फोटो उनके ही विभाग के कर्मचारी ने क्लिक की थी, जिसे बाद में सार्वजनिक किया गया।
Uttar Pradesh News: जोनल अधिकारी की रिपोर्ट से खुलासा
जोनल अधिकारी और अभियंता राजीव कुमार ने मामले की जांच की। उनकी रिपोर्ट में बताया गया कि पूर्व संपत्ति अधिकारी निपेंद्र बहादुर सिंह और अधीक्षण अभियंता अजय कुमार मित्तल ने अधूरे टावरों की गलत गणना कर बिल्डर को लगभग 7 करोड़ रुपए का लाभ पहुँचाया। यह एक बड़ी अनियमितता मानी जा रही है।

Uttar Pradesh News Today: नियमों का उल्लंघन
नियमों के अनुसार, भूखंड की समय वृद्धि की गणना पूरे भूखंड पर की जाती है और इसके लिए आवास आयुक्त की अनुमति आवश्यक होती है। लेकिन कुछ अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए केवल कुछ टावरों पर गणना की और इससे बिल्डर और खुद को लाभ पहुँचाया। स्वीकृति प्रक्रिया को नजरअंदाज किया गया और संस्था को सीधे नुकसान हुआ।
पत्राचार और अनदेखी
दस्तावेज़ों के अनुसार, फरवरी 2025 तक अधिकारियों ने अधूरे निर्माण की स्थिति को बार-बार नोट करने के बावजूद स्वीकृति प्रक्रिया में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि निपेंद्र बहादुर सिंह पर पहले भी भ्रष्टाचार के मामले में निलंबन हो चुका था। इसके बावजूद उन्हें गाजियाबाद आवास विकास परिषद में संपत्ति अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था। 23 अगस्त 2025 को उनकी भ्रष्टाचार से जुड़ी रिकॉर्डिंग वायरल होने पर उन्हें फिर से सस्पेंड कर दिया गया। वहीं, अधीक्षण अभियंता अजय कुमार मित्तल ने खुद को आवास आयुक्त का “खास” बताकर एक साथ तीन विभागों की जिम्मेदारी संभाली हुई थी।
“जीरो टॉलरेंस नीति” पर सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “जीरो टॉलरेंस पॉलिसी” के बावजूद इस तरह की अनियमितताएं सामने आ रही हैं। अब यह देखने वाली बात है कि आवास आयुक्त और विजिलेंस विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।
भ्रष्टाचार की साजिश का खुलासा
सिद्धार्थ विहार योजना के अधूरे टावरों की गलत गणना यह दिखाती है कि कुछ अधिकारी निजी लाभ के लिए सरकारी नियमों का उल्लंघन कर सकते हैं। यह घोटाला केवल सरकारी अधिकारियों की लापरवाही ही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर भी पेश करता है। आवास आयुक्त बलकार सिंह से जब इस मामले पर संपर्क किया गया, तो उनके कार्यालय से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
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