केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पिछले तीन साल में 112 अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किए हैं। इन अधिकारियों में से 76 अधिकारी अभी भी सेवारत हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूछे गए सवालों के जवाब में यह जानकारी दी।
राज्यसभा में बोलते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि एक जनवरी 2018 से 31 अक्टूबर 2021 के बीच सीबीआई ने 112 अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किए हैं। उन्होंने कहा कि ‘भ्रष्टाचार के विरूद्ध शून्य सहनशीलता’’ की अपनी प्रतिबद्धता का पालन करते हुए सरकार ने भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए कई कदम उठाए हैं जिनमें अन्य बातों के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण कानून, 1988 में संशोधन शामिल हैं, जिसके तहत रिश्वत देने को भी स्पष्ट रूप से अपराध घोषित किया गया है और लोकपाल की संस्था को क्रियाशील बनाया गया है।
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राज्यों में नियुक्त अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई में देरी होने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आठ राज्यों से इस संबंध में अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे राज्य चुनिंदा आधार पर सीबीआई को जांच करने के लिए सहमति देते हैं।
जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि ऐसे राज्य आमतौर पर सीबीआई पर भरोसा नहीं करते लेकिन जब अपने प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाने की बात आती है तो वे सीबीआई पर भरोसा करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे राज्यों को गुजरात से सीख लेनी चाहिए जहां 2014 के पहले सरकार से जुड़े कई लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए और राज्य सरकार ने सीबीआई को जांच की अनुमति देने से इनकार नहीं किया। इसके स्थान पर राज्य ने जांच में एजेंसी को सहयोग किया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में व्यापक विचार विमर्श और आत्ममंथन किए जाने की जरूरत है।


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