केंद्र को भाजपा में सही सोचने वाले लोगों की सुननी चाहिए: किसान नेताओं ने कहा - Latest News In Hindi, Breaking News In Hindi, ताजा ख़बरें, Daily News In Hindi

केंद्र को भाजपा में सही सोचने वाले लोगों की सुननी चाहिए: किसान नेताओं ने कहा

मंगलवार को किसान नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार को पार्टी में ‘‘सही सोचने वाले लोगों’’ की सुननी चाहिए और जनवरी से रुकी पड़ी वार्ता बहाल करनी चाहिए।

बीते दिन मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कृषि कानूनों के खिलाफ और एमएसपी की मांग को लेकर हो रहे किसान आंदोलन  के पक्ष में बयान दिया था।उन्होंने कहा था की  कि अगर किसानों की नहीं सुनी गई तो यह केंद्र सरकार दोबारा नहीं आयेगी। जिसपर आज यानी मंगलवार को किसान नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार को पार्टी में ‘‘सही सोचने वाले लोगों’’ की सुननी चाहिए और जनवरी से रुकी पड़ी वार्ता बहाल करनी चाहिए।
किसानों के पक्ष में मालिक1634658184 malik
प्रदर्शनकारी किसानों का समर्थन कर रहे मलिक ने रविवार को जोर देते हुए कहा कि यदि केंद्र फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी देने के लिए राजी हो, तो वह मध्यस्थता करने को तैयार हैं। मलिक ने राजस्थान के झुंझुनू में एक कार्यक्रम में कहा था, ‘‘सिर्फ एक चीज पूरे मुद्दे का हल कर देगी। यदि सरकार एमएसपी गारंटी देने को राजी हो जाती है, तो मैं मध्यस्थता करूंगा और किसानों को समझाऊंगा।’’
सरकार पर दबाव डालना जारी 1634658257 tikk
एलायंस फॉर सस्टेनेबल एंड हॉलिस्टिक एग्रीकल्चर (आशा) की कविता कुरूगंती का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी में ‘‘सही सोचने वाले लोगों’’ को किसानों की मांगें पूरी कराने के लिए दबाव डालना जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि सरकार और किसानों के बीच मध्यस्थता की जरूरत नहीं है। लेकिन, भाजपा में सही सोचने वाले लोगों को किसानों की मांगें पूरी कराने के लिए पार्टी और सरकार पर दबाव डालना जारी रखना चाहिए।’’
अजय मिश्रा टेनी की बर्खास्तगी1634658331 ajay
कुरूगंती ने कहा कि वैध और वाजिब मांगों को पूरा करने से इनकार करने के पीछे कोई तर्क नहीं है।उन्होंने कहा, ‘‘पार्टी में किसान हितैषी इस आवाज को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि पार्टी में नैतिकता इतनी नहीं गिर जाए कि जहां से लौटा नहीं जा सके। उन्हें (राज्य मंत्री) अजय मिश्रा टेनी की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी सुनिश्चित करनी चाहिए।’’कुरूगंती के विचारों से सहमति जताते हुए संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) का हिस्सा एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक प्रभावकारी समूह भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने कहा कि मलिक ने पहले भी समर्थन किया था, लेकिन भाजपा ने उनकी नहीं सुनी थी। हालांकि, यदि मांगें पूरी हो जाती हैं, तो कोई भी मध्यस्थ के तौर पर काम करे, उसके लिए वह तैयार है।
बीकेयू मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘हमारी दो मुख्य मांगें हैं। नये कृषि कानूनों को वापस लिया जाए और फसलों की एमएसपी सुनश्चित करने वाला एक नया कानून बनाया जाए।’’उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रहने वाले मलिक ने किसानों के मुद्दे पर पहले भी केंद्र को सलाह देने की कोशिश की थी, लेकिन भाजपा उनकी नहीं सुनी थी।मलिक ने कहा, ‘‘उन्हें सुनने के बजाय, उनकी खुद की पार्टी ने उन्हें मेघालय का राज्यपाल बनाया और वहां भेजा।’’
 किसान नेता अभिमन्यु कोहार1634658459 abi
भारतीय किसान मजदूर महासंघ के किसान नेता अभिमन्यु कोहार ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों और स्थिति से अवगत नहीं होती, तो मध्यस्थता से मदद मिलती। उन्होंने कहा, ‘‘हमें मध्यस्थता की जरूरत नहीं है। सरकार के साथ हमने 11 दौर की वार्ता मध्यस्थता के बगैर की और ऐसा नहीं है कि वे हमारी मांगें नहीं जानते हैं। जब वे हमारी मांगों से पूरी तरह से अवगत हैं, तब सिर्फ उन्हें और हमें बैठ कर वार्ता करने और एक निर्णय पर पहुंचने की जरूरत है। 

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