माकपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बृहस्पतिवार को G-7 शिखर बैठक ( G-7 Summit) में ”2021 ओपन सोसाइटीज स्टेटमेंट” (Open Societies Statement) नामक दस्तावेज पर भारत के हस्ताक्षर को लेकर ‘दोहरे मापदंड और पाखंड’ का आरोप लगाया।
वामपंथी पार्टी के मुखपत्र ‘पीपुल्स डेमोक्रेसी’ के ताजा संपादकीय में कहा गया है कि भारत सरकार ने भले ही इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिया हो, लेकिन लोकतंत्र के विभिन्न मूल्यों के संदर्भ में इस सरकार का रिकॉर्ड बहुत ही खराब है। माकपा ने आरोप लगाया, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी में दोहरे मापदंड और पाखंड की असीम क्षमता है।
जी-7 की बैठक में उनका यह प्रदर्शन नयी उंचाइयों को छू गया।’’ गौरतलब है कि जी-7 समूह के देशों, भारत और कुछ अन्य राष्ट्रों ने पिछले दिनों ”2021 ओपन सोसाइटीज स्टेटमेंट” नामक एक दस्तावेज़ हस्ताक्षर किया।
इस दस्तावेज में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लोकतंत्र के रक्षक के रूप में वर्णित किया गया है। जी-7 समूह में ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका शामिल हैं।


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