मनीष तिवारी का लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह, वन संरक्षण विधेयक पर संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं का पालन हो

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने ‘वन (संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2023’ को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजे जाने के कदम की आलोचना करते हुए बृहस्पतिवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से आग्रह किया है कि संसदीय नियमों एवं प्रक्रिया का पालन किया जाए।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने ‘वन (संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2023’ को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजे जाने के कदम की आलोचना करते हुए बृहस्पतिवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से आग्रह किया है कि संसदीय नियमों एवं प्रक्रिया का पालन किया जाए। उन्होंने कहा है कि इस विधेयक की छानबीन करना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन संबंधी संसद की स्थायी समिति के अधिकारक्षेत्र में आता है।
जलवायु परिवर्तन संबंधी संसद की स्थायी समिति के दायरे में आता है
तिवारी ने बिरला को पत्र लिखकर यह भी कहा कि विधेयक को संयुक्त समिति को भेजे जाने से स्थायी समिति को दरकिनार किया गया है। कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘इस विधेयक को संयुक्त समिति के पास भेजा गया है, लेकिन यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन संबंधी संसद की स्थायी समिति के दायरे में आता है।’’ 
उन्होंने दावा किया कि भारत सरकार वन (संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2023 को संयुक्त समिति को भेजकर स्थायी समिति को जानबूझकर दरकिनार कर रही है, जबकि स्थायी समिति ने विधेयक को सभी संबंधित पक्षों की पूरी भागीदारी के साथ इस पर विचार-विमर्श किया होता।
केंद्रीय मंत्री ने संसद की एक संयुक्त समिति को विचारार्थ भेजने का रखा प्रस्ताव 
इससे पहले, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बुधवार को राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ से आग्रह किया था कि वह इस मामले में दखल दें ताकि इसे संबंधित स्थायी समिति को भेजा जाए तथा इस विधेयक को पूरी तरह कमजोर होने से रोका जा सके। उल्लेखनीय है कि लोकसभा ने बुधवार को ‘वन (संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2023’ को संसद की एक संयुक्त समिति को भेजने का निर्णय लिया।
केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सदन में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच ‘वन (संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2023’ पेश किया। ‘वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980’ का और संशोधन करने वाले उक्त विधेयक को केंद्रीय मंत्री ने संसद की एक संयुक्त समिति को विचारार्थ भेजने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।

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