सरकार आज लोकसभा में ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022 पेश करने वाली है।केंद्रीय बिजली मंत्री आर.के. सिंह ऊर्जा संरक्षण पर विधेयक लाएंगे, शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 2009 में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश करेंगे।
बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और बदलते वैश्विक जलवायु परिदृश्य के बीच केंद्र ने ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 में कुछ संशोधनों का प्रस्ताव करके अक्षय ऊर्जा के उच्च स्तर को प्राप्त करने के लिए नए क्षेत्रों की पहचान की है।इसका उद्देश्य अंत में अक्षय ऊर्जा की मांग को बढ़ाना होगा। उद्योग, भवन, परिवहन आदि जैसे क्षेत्रों का उपयोग करें।
भारत में कार्बन बाजार के विकास की सुविधा प्रदान करेंगे
विद्युत मंत्रालय ने हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद संशोधन तैयार किए हैं। प्रस्ताव में औद्योगिक इकाइयों या किसी प्रतिष्ठान द्वारा समग्र खपत में अक्षय ऊर्जा के न्यूनतम हिस्से को परिभाषित करना शामिल है।प्रस्तावित संशोधन भारत में कार्बन बाजार के विकास की सुविधा प्रदान करेंगे और अक्षय ऊर्जा की न्यूनतम खपत या तो प्रत्यक्ष खपत या ग्रिड के माध्यम से अप्रत्यक्ष उपयोग के रूप में निर्धारित करेंगे। इससे जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा खपत और वातावरण में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी।

वित्त और आवास और शहरी मामलों की स्थायी समिति की रिपोर्ट भी पेश
भारत जलवायु परिवर्तन से निबटने में सबसे आगे खड़ा है और 2005 के स्तरों के मुकाबले 2030 में उत्सर्जन की तीव्रता को 33-35 प्रतिशत तक कम करने के लिए एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के लिए प्रतिबद्ध है।इसके अलावा प्रवासी भारतीयों के कल्याण : नीतियों, योजनाओं के विषय पर विदेश मामलों की स्थायी समिति की सरकारी व्यावसायिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाएगी।वित्त और आवास और शहरी मामलों की स्थायी समिति की रिपोर्ट भी पेश की जाएगी।


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