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यौन उत्पीड़न के बाद एयरफोर्स की महिला अधिकारी का हुआ टू-फिंगर टेस्ट, NCW ने लिया संज्ञान

राष्ट्रीय महिला आयोग ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि एयरफोर्स के ही डॉक्टरों की ओर से टू-फिंगर टेस्ट किया जाना महिला अधिकारी की गरिमा और निजता का हनन है।

यौन उत्पीड़न की शिकार एयरफोर्स की महिला अधिकारी ने डॉक्टरों पर दुष्कर्म की पुष्टि के लिए टू-फिंगर टेस्ट करने का आरोप लगाया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंध के बावजूद टू-फिंगर टेस्ट करने के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने स्वत: संज्ञान लिया है। महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने एयर चीफ मार्शल को पत्र लिखकर मामले पर कार्रवाई की मांग की है। 
आयोग ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि एयरफोर्स के ही डॉक्टरों की ओर से टू-फिंगर टेस्ट किया जाना महिला अधिकारी की गरिमा और निजता का हनन है। आयोग ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के भी खिलाफ है, जिसमें इस तरह के टेस्ट पर रोक लगाने की बात कही गई थी। 
बता दें कि एयरफोर्स की महिला अधिकारी ने एक अन्य अधिकारी पर रेप का आरोप लगाया था। महिला अधिकारी का कहना था कि उसके साथ एयरफोर्स एडमिनिस्ट्रेटिव कॉलेज में ही रेप किया गया। इस घटना की कोयंबटूर जिले में एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद आरोपी फ्लाइट लेफ्टिनेंट ने पुलिस के सामने सरेंडर भी कर दिया था। फिलहाल आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है।
क्या है टू-फिंगर टेस्ट?
टू-फिंगर टेस्ट एक मैन्युअल प्रक्रिया है। इसके तहत डॉक्टर पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में एक या दो उंगली डालकर टेस्ट करते हैं कि वह वर्जिन है या नहीं। यदि उंगलियां आसानी से चली जाती हैं तो माना जाता है कि वह सेक्सुअली एक्टिव थी। इससे वहां उपस्थित हायमन का पता भी लगाया जाता है। इस प्रक्रिया की तीखी आलोचना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसपर रोक लगा दी। 2014 में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने भी टू-फिंगर टेस्ट को अवैज्ञानिक करार दिया था।

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