PM मोदी ने स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा को दी श्रद्धांजलि, कहा- उनके योगदान को देश कभी भुला नहीं पाएगा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि आजादी की लड़ाई में उनके योगदान को देश कभी भुला नहीं पाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि आजादी की लड़ाई में उनके योगदान को देश कभी भुला नहीं पाएगा। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ‘‘महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। देश को गुलामी से मुक्त कराने के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। कृतज्ञ राष्ट्र आजादी की लड़ाई में उनके योगदान को कभी भुला नहीं पाएगा।’’


मोदी ने कहा कि वह खुद को धन्य महसूस करते हैं कि उन्हें 2003 में गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए स्विट्जरलैंड से श्यामजी कृष्ण वर्मा की अस्थियां भारत लाने और वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री के रूप में अपनी ब्रिटेन यात्रा के दौरान उनकी पुनर्नियुक्ति का प्रमाणपत्र हासिल करने का सौभाग्य हासिल हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण है कि आज के युवा श्यामजी कृष्ण वर्मा के साहस और उनकी महानता के बारे में जानें।’’


नायडू ने श्यामजी कृष्ण वर्मा को किया नमन

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने भी स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी श्यामजी कृष्ण वर्मा को उनकी जयंती पर नमन किया है। नायडू ने सोमवार को जारी एक संदेश में कहा कि श्यामजी कृष्ण वर्मा एक समर्पित देश भक्त थे जिन्होंने लंदन के इंडिया हाउस क्रांतिकारियों का केंद्र बना दिया था। उनके विचार और जीवन दर्शन लगातार भारतीयों को प्रेरित करते रहेंगे।


नायडू ने कहा, ‘‘भारतीय संस्कृति के महान विद्वान और यूरोप में युवा क्रांतिकारियों के मार्गदर्शक श्यामजी कृष्ण वर्मा जी की जयंती पर उनकी पावन स्मृति को सादर नमन। उन्होंने इंग्लैंड में पढ़ने वाले भारतीय युवाओं के लिए इंडिया हाउस की स्थापना की जो यूरोप में भारतीय क्रांतिकारियों का प्रमुख केंद बन गया।’’


श्यामजी कृष्ण वर्मा का जन्म चार अक्टूबर, 1857 को गुजरात के कच्छ जिले के मांडवी गांव में हुआ था। ज्ञात हो कि 31 मार्च, 1930 को जिनेवा के एक अस्पताल में श्यामजी कृष्ण वर्मा का निधन हो गया था। उनका पार्थिव शरीर अंतरराष्ट्रीय कानूनों के कारण भारत नहीं लाया जा सका और वहीं उनकी अन्त्येष्टि कर दी गई। उनका दाह संस्कार कर उनकी अस्थियों को जिनेवा की सेंट जॉर्ज सिमेट्री में सुरक्षित रख दिया गया था। गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद मोदी 2003 में जिनेवा गए और वर्मा की अस्थियां लेकर भारत आए।

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