अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच करीब पाँच घंटे हुई चर्चा में भारत ने आतंकवाद और एच1बी वीजा का मुद्दा उठाया।
श्री ट्रंप की दो दिवसीय भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सुरक्षा एवं रक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी एवं व्यापार समेत कई अन्य मुद्दों पर बात हुई। विदेश सचिव हर्षवर्द्धन श्रृंगला ने बताया कि दोनों नेताओं ने सोमवार और मंगलवार को विभिन्न अवसरों पर कुल मिलाकर करीब पाँच घंटे चर्चा की। इसमें आज सुबह हैदराबाद हाउस में हुई विस्तृत चर्चा भी शामिल है।
मुख्य रूप से सुरक्षा एवं रक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी एवं व्यापार, लोगों के बीच आपसी संपर्क, वैश्विक मुद्दे और कुछ क्षेत्रीय मुद्दों पर बात हुई। भारत ने अमेरिका के समक्ष पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद और एच1बी वीजा का मुद्दा भी उठाया। व्यापार को लेकर उन्होंने कहा कि दोनों देशों में एक निश्चित स्तर की सहमति बनी है, लेकिन अभी कोई समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही व्यापार से जुड़ दस्तावेजों को अंतिम रूप दे दिया जायेगा।
एक प्रश्न के उत्तर में श्री श्रृंगला ने कहा कि दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद को मिलने वाली वित्तीय मदद के लिए जिम्मेदारी तय करने और नशीली दवाओं के बारे में बातचीत हुई। दोनों देशों के बीच मिलकर आतंकवाद से लड़ने पर भी सहमति बनी। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि चर्चा के बारे में पूरी जानकारी मीडिया के साथ साझा नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा कि भारत ने एच1बी वीजा का मुद्दा भी उठाया। हमने यह बताया कि भारतीय पेशेवर अमेरिका के हाईटेक सेक्टर के विकास में काफी अहम योगदान देते हैं। वे वहाँ के लोकतांत्रिक पृष्ठभूमि में भी योगदान देते हैं। आठ साल से कम वहाँ काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को सामाजिक सुरक्षा में दी गयी अंशदान की राशि वापस करने का मुद्दा भी उठा।
अमेरिकी राष्ट्रपति के इस दौरे की सफलता के बारे में पूछे गये एक प्रश्न के उत्तर में विदेश सचिव ने कहा कि यह दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। अमेरिका के साथ रक्षा तथा सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास, वाणिज्य, ऊर्जा और लोगों के बीच संपर्क पर चर्चा हुई। ये सभी मुद्दे दोनों देशों के संबंधों को नयी ऊंचाई पर ले जायेंगे।
एक प्रश्न के उत्तर में श्री श्रृंगला ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर में हुये सकारात्मक बदलावों के बारे में भी अमेरिकी राष्ट्रपति को अवगत कराया गया। उन्हें यह बताया गया कि अब फोकस वहाँ विकास और पर्यटन को बढ़वा देने पर है। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि नागरिकता (संशोधन) कानून (सीएए) के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई।
विदेश सचिव ने कहा कि अमेरिकी कंपनी वेसि्टंग हाउस इलेक्ट्रिक कॉर्पोरेशन और न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के देश में परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने का मुद्दा भी चर्चा के दौरान उठा था। इस पर जल्द अंतिम निर्णय होने की संभावना है।
जी-7 देशों और ऑस्ट्रेलिया द्वारा वैश्विक संपर्क बढ़ने के लिए शुरू की गयी ‘ब्लू डॉट पहल’ के बारे में उन्होंने कहा कि इस पर भी चर्चा हुई थी, लेकिन इसमें शामिल होने से पहले भारत इसे और परखना चाहेगा तथा इसका और अध्ययन करना चाहेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस पर विचार करने के लिए और समय चाहिए।’’
श्री श्रृंगला ने कहा कि सुरक्षा एवं रक्षा के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच पहले से ही दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी है। अब इसे वृहद वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले जाने के बारे में वार्ता हुई। रक्षा एवं सुरक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर सहमति बनी।
रक्षा के क्षेत्र में श्री ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अमेरिका हथियारों की आपूर्ति और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में भारत को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा। इससे कई अत्याधुनिक तकनीक भारत को सौंपने के लिए कम समय में मंजूरी मिल सकेगी। विदेश सचिव ने कहा कि अमेरिका से भारत की रक्षा खरीद काफी बढ़ है। वर्ष 2014-15 से अब तक नौ अरब डॉलर की रक्षा खरीद अमेरिका से हुई है।


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