कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को उच्चतम न्यायालय की ओर रुख किया जिसे आदेश में गुजरात उच्च न्यायालय ने मानहानि मामले में जिसमें आपराधिक मानहानि मामले में उनकी सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था। जिसमें सूरत अदालत ने ‘मोदी उपनाम’ टिप्पणी पर उन्हें दो साल जेल की सजा सुनाई थी। मामले में दोषी सिद्ध होने के बाद गांधी की लोकसभा से सांसद के रूप में सदस्यता रद कर दी गई थी।
उच्च न्यायालय ने 7 जुलाई को गुजरात सत्र अदालत के फैसले की पुष्टि की
लोकसभा सचिवालय की एक अधिसूचना के बाद 24 मार्च को गांधी को केरल के वायनाड से सांसद के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था। गांधी को दो साल की कैद की सजा सुनाई गई, जिसने उन्हें जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की कठोरता के तहत एक सांसद के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया। उच्च न्यायालय ने 7 जुलाई को गुजरात सत्र अदालत के फैसले की पुष्टि की, जिसने 23 मार्च को गांधी को दोषी ठहराने और भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक मानहानि के लिए अधिकतम सजा देने के मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
दोषसिद्धि पर रोक कोई नियम नहीं बल्कि एक अपवाद
गांधी की याचिका को खारिज करते हुए, उच्च न्यायालय ने कहा है कि वह “बिल्कुल गैर-मौजूद आधार” पर उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं और दोषसिद्धि पर रोक कोई नियम नहीं बल्कि एक अपवाद है। मार्च में, मजिस्ट्रेट अदालत ने गांधी को 2019 के राष्ट्रीय चुनावों से पहले ‘मोदी’ उपनाम के बारे में उनकी टिप्पणी के लिए दोषी ठहराया था। मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा गांधी को दोषी ठहराए जाने के बाद, उन्होंने सत्र अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसने 20 अप्रैल को उनकी सजा पर रोक लगाने की उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद, उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।


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