Punjab News: पंजाब ने पहली बार एशियाई हॉकी चैंपियनशिप की मेजबानी करके अपनी समृद्ध खेल विरासत में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने 28 अक्टूबर 2026 को जालंधर स्थित ओलंपियन सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम में ‘हीरो एशियन चैंपियंस ट्रॉफी पंजाब-2026’ का उद्घाटन किया। इस आयोजन के साथ पंजाब के हॉकी खिलाड़ियों का अपनी धरती पर इस स्तर की अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप खेलने का वर्षों पुराना सपना भी साकार हुआ है।
छह देशों की टीमों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब विश्व हॉकी के मंच पर अपना पुराना गौरव दोबारा हासिल करने के लिए तैयार है। इस टूर्नामेंट के सभी लीग मुकाबले जालंधर में खेले जाएंगे, जबकि सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले मोहाली में आयोजित होंगे। इसके साथ ही राज्य सरकार वर्ष 2030 में हॉकी विश्व कप की मेजबानी करने की दिशा में भी तैयारी कर रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बांग्लादेश, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और मलेशिया से आई टीमों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने सभी टीमों के कप्तानों को सम्मानित भी किया। इस अवसर पर ओलंपियन, पूर्व हॉकी खिलाड़ी, हॉकी इंडिया और अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ के प्रतिनिधि, खेल प्रेमी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
भारतीय हॉकी में पंजाब के योगदान का सम्मान है यह चैंपियनशिप

जालंधर के ओलंपियन सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम में आयोजित उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब में पहली बार इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का आयोजन होना राज्य के लिए गर्व की बात है। यह भारतीय हॉकी में पंजाब के असाधारण योगदान और खेलों के प्रति यहां के लोगों के जुनून को सम्मान देने का अवसर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार राज्य की खेल प्रतिष्ठा को दोबारा मजबूत करने और चैंपियनों की नई पीढ़ी तैयार करने के लिए लगातार काम कर रही है। इसके लिए खेल सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ाई जा रही है और युवा खिलाड़ियों को विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पंजाब और हॉकी का रिश्ता बहुत पुराना और मजबूत है। भारतीय हॉकी में राज्य का योगदान केवल खिलाड़ियों की भागीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जुनून, त्याग, अनुशासन और खेल भावना से बनी एक समृद्ध विरासत है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, पंजाबी खिलाड़ियों के योगदान के बिना भारतीय हॉकी के इतिहास की कल्पना करना मुश्किल है। पंजाब अपनी उपजाऊ जमीन, मेहनती किसानों और देश की खाद्य सुरक्षा में योगदान के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। इसी धरती ने ऐसे ओलंपियन, विश्व चैंपियन और खेल नायक भी दिए हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगे का मान बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि हॉकी पंजाब के लोगों की पहचान का हिस्सा है। राज्य की हर पीढ़ी के खिलाड़ियों ने इस विरासत को गर्व के साथ आगे बढ़ाया है और भारतीय हॉकी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।
पंजाब ने देश को दिए 77 हॉकी ओलंपियन, 48 खिलाड़ियों ने जीते पदक

भारतीय हॉकी में पंजाब के योगदान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि वर्ष 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक से लेकर वर्ष 2024 के पेरिस ओलंपिक तक पंजाब ने देश को 77 हॉकी ओलंपियन दिए हैं। इनमें से राज्य के 48 खिलाड़ियों ने ओलंपिक पदक जीते हैं।
उन्होंने बताया कि पंजाबी खिलाड़ियों ने 10 बार ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी भी की है। यह भारतीय हॉकी में पंजाब के लंबे समय से चले आ रहे योगदान और नेतृत्व को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने देश के महान हॉकी खिलाड़ियों बलबीर सिंह सीनियर, ऊधम सिंह, पृथिपाल सिंह, अजीत पाल सिंह, सुरजीत सिंह और परगट सिंह को याद करते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों की उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के युवाओं को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहेंगी।
उन्होंने वर्ष 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में बलबीर सिंह सीनियर के प्रदर्शन का विशेष उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस ओलंपिक के फाइनल मुकाबले में बलबीर सिंह सीनियर ने पांच गोल करके भारतीय हॉकी के इतिहास में एक यादगार उपलब्धि हासिल की थी।
उन्होंने ऊधम सिंह के चार ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने और पदक जीतने के शानदार रिकॉर्ड को भी प्रेरणादायक बताया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इन दिग्गज खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से भारतीय हॉकी की पहचान दुनिया भर में मजबूत की।
टोक्यो और पेरिस ओलंपिक में भारतीय हॉकी ने फिर दिखाई ताकत

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि वर्ष 2021 के टोक्यो ओलंपिक और वर्ष 2024 के पेरिस ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने लगातार कांस्य पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। इन उपलब्धियों से भारतीय हॉकी में ओलंपिक पदक जीतने का सिलसिला फिर मजबूत हुआ।
उन्होंने कहा कि इससे पहले भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने लगातार दो ओलंपिक में पदक जीतने की उपलब्धि 52 साल के अंतराल के बाद हासिल की थी। दोनों ओलंपिक टीमों में पंजाब के खिलाड़ियों की मजबूत मौजूदगी राज्य के महत्व को दिखाती है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली मौजूदा भारतीय पुरुष हॉकी टीम में पंजाब के आठ खिलाड़ी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि पंजाब आज भी भारतीय हॉकी को प्रतिभाशाली खिलाड़ी देने में अहम भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने वर्ष 1975 में भारत की पुरुष हॉकी टीम की विश्व कप जीत का भी जिक्र किया। उस टीम की कप्तानी अजीत पाल सिंह ने की थी। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने वर्ष 2001 में गगन अजीत सिंह और वर्ष 2016 में हरजीत सिंह की कप्तानी में भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम के विश्व कप जीतने में पंजाब के योगदान को भी याद किया।
जालंधर के गांवों से निकले 20 से ज्यादा ओलंपियन

भारतीय हॉकी में जालंधर के योगदान पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जालंधर और आसपास के गांवों ने कई पीढ़ियों तक ओलंपियन और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किए हैं। इन क्षेत्रों ने भारतीय हॉकी को ऐसी प्रतिभाएं दी हैं, जिन्होंने देश को दुनिया भर में पहचान दिलाई।
उन्होंने संसारपुर, खुसरोपुर और मिट्ठापुर जैसे गांवों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इन गांवों ने हॉकी के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। यहां से 20 से अधिक ओलंपियन निकले हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन गांवों में हॉकी केवल मनोरंजन या खेल का साधन नहीं है, बल्कि यह पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ने वाली परंपरा है। यहां के बच्चे बचपन से ही हॉकी के प्रति लगाव रखते हैं और अपने परिवारों तथा गांवों की खेल विरासत को आगे बढ़ाने का सपना देखते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे गांवों और क्षेत्रों को प्रोत्साहित करके पंजाब में हॉकी की प्रतिभाओं को और बेहतर अवसर दिए जा सकते हैं। इससे राज्य की पुरानी खेल पहचान को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
ओलंपियन सुरजीत सिंह की याद में स्टेडियम में स्थापित की गई प्रतिमा

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जालंधर का ओलंपियन सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम पंजाब के लिए भावनात्मक रूप से बहुत खास है। यह स्टेडियम राज्य की हॉकी विरासत, खिलाड़ियों के संघर्ष और उनकी उपलब्धियों का प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि इस स्टेडियम का नाम सुरजीत सिंह के नाम पर रखा गया है, जो वर्ष 1975 में भारत की विश्व कप विजेता हॉकी टीम का हिस्सा थे। उनके योगदान को सम्मान देने के लिए चैंपियनशिप के अवसर पर स्टेडियम में ओलंपियन सुरजीत सिंह की प्रतिमा भी स्थापित की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरजीत सिंह जैसे खिलाड़ियों ने अपने खेल और समर्पण से पंजाब की हॉकी को मजबूत बनाया। उनकी उपलब्धियां आज भी युवा खिलाड़ियों को मेहनत करने और देश के लिए बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देती हैं।
उन्होंने स्टेडियम में संचालित पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स सेंटर और खेलो इंडिया सेंटर की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। इन केंद्रों में युवा हॉकी खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देकर भविष्य के सितारों के रूप में तैयार करने का काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्तमान में पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स सेंटर में 102 हॉकी खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं, जबकि खेलो इंडिया सेंटर में 33 अन्य खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिल रहा है।
जालंधर में होंगे सभी लीग मैच, मोहाली में खेले जाएंगे सेमीफाइनल और फाइनल

चैंपियनशिप की व्यवस्था के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि जालंधर का ओलंपियन सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम लीग चरण के सभी मुकाबलों की मेजबानी करेगा। वहीं, मोहाली स्थित ओलंपियन बलबीर सिंह सीनियर अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि इस स्तर की अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप को पंजाब में आयोजित करना राज्य के लिए गर्व का विषय है। इससे पंजाब के खेल ढांचे, मेहमाननवाजी और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन के जरिए दुनिया के अलग-अलग देशों के खिलाड़ी और अधिकारी पंजाब की खेल सुविधाओं को करीब से देख सकेंगे। इससे भविष्य में राज्य में बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के आयोजन की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार का प्रयास है कि खिलाड़ियों और दर्शकों को बेहतर सुविधाएं मिलें और टूर्नामेंट का आयोजन सफलतापूर्वक किया जाए।
पंजाब में छह नए एस्ट्रो-टर्फ हॉकी मैदान बनाए गए

खेलों के विकास के लिए राज्य सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरकार के कार्यकाल में हॉकी के छह नए एस्ट्रो-टर्फ मैदान स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा, दो अन्य मैदानों का निर्माण किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जमीनी स्तर पर हॉकी को बढ़ावा देने के लिए राज्य में 18 छह-ए-साइड एस्ट्रो-टर्फ हॉकी मैदान भी तैयार किए गए हैं। इन मैदानों से बच्चों और युवाओं को हॉकी खेलने के लिए बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल बड़े टूर्नामेंट आयोजित करना नहीं है, बल्कि गांवों और छोटे शहरों में भी खेलों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इससे ज्यादा से ज्यादा युवा खेलों से जुड़ सकेंगे और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।
उन्होंने कहा कि खेलों में बेहतर प्रदर्शन के लिए मैदान, प्रशिक्षण और सही मार्गदर्शन बेहद जरूरी हैं। इसी दिशा में पंजाब सरकार खेल सुविधाओं को लगातार मजबूत कर रही है।
‘खेडां वतन पंजाब दियां’ के चौथे सीजन में छह लाख से अधिक पंजीकरण

मुख्यमंत्री ने ‘खेडां वतन पंजाब दियां’ पहल को राज्य में खेलों को बढ़ावा देने वाला एक बड़ा मंच बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल के जरिए अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों को खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
भगवंत सिंह मान ने बताया कि ‘खेडां वतन पंजाब दियां’ के चौथे सीजन के लिए छह लाख से अधिक खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया है। यह आंकड़ा राज्य में खेलों के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
इसके साथ ही ‘मुख्यमंत्री खेल मैदान’ पहल के तहत पंजाब भर में 3,000 से अधिक खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं। इन मैदानों का उद्देश्य लोगों को अपने आसपास ही खेलों की सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स के 14 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में 1,870 खिलाड़ियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन केंद्रों में खिलाड़ियों को उनकी क्षमता के अनुसार तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
नई खेल नीति और 1,744 करोड़ रुपये के बजट से मजबूत होगा खेल ढांचा

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में नई खेल नीति लागू की थी। इस नीति का उद्देश्य पंजाब में खेलों को बढ़ावा देना, खिलाड़ियों को जरूरी सहायता देना और आधुनिक खेल सुविधाओं का विकास करना है।
उन्होंने बताया कि खेलों के लिए 1,744 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। यह बजट खेल ढांचे को मजबूत करने और प्रमुख प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे खिलाड़ियों को सहायता उपलब्ध कराने के सरकार के प्रयासों को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार खेल मैदानों, प्रशिक्षण केंद्रों और जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए निवेश कर रही है। इससे युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के अधिक अवसर मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि पंजाब के खिलाड़ियों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता है। जरूरत इस बात की है कि उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और आगे बढ़ने के लिए उचित मंच मिले।
2030 में हॉकी विश्व कप की मेजबानी करेगा पंजाब

अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन की पंजाब की क्षमता पर विश्वास जताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य वर्ष 2030 में हॉकी विश्व कप की मेजबानी करने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि ‘हीरो एशियन चैंपियंस ट्रॉफी पंजाब-2026’ इस दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस टूर्नामेंट के जरिए राज्य अपनी तैयारियों, खेल सुविधाओं और बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को सफलतापूर्वक आयोजित करने की क्षमता प्रदर्शित कर सकेगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस तरह की चैंपियनशिप पंजाब के ऐतिहासिक हॉकी गौरव को दोबारा मजबूत करने में भी मदद करेगी। राज्य में पहले से मौजूद हॉकी की मजबूत परंपरा और खिलाड़ियों की प्रतिभा बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए आधार तैयार कर सकती है।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार खेलों के क्षेत्र में राज्य की पहचान को और मजबूत करना चाहती है, ताकि यहां के खिलाड़ी दुनिया के बड़े मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व कर सकें।
चैंपियनशिप से खेल पर्यटन और स्थानीय कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस चैंपियनशिप का फायदा केवल हॉकी के मैदान तक सीमित नहीं रहेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट से पंजाब में खेल पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजनों से होटल और आतिथ्य क्षेत्र, खेल उपकरण उद्योग तथा इससे जुड़े दूसरे कारोबारों को भी लाभ मिल सकता है। अलग-अलग देशों से आने वाले खिलाड़ी, अधिकारी और दर्शक स्थानीय बाजारों तथा पर्यटन स्थलों से जुड़ेंगे।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इससे स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार और दूसरे अवसर भी पैदा हो सकते हैं। बड़े खेल आयोजनों से किसी राज्य की संस्कृति, खानपान और पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में भी मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि पंजाब इस चैंपियनशिप के जरिए अपनी मेहमाननवाजी और सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने पेश करने के लिए तैयार है।
पंजाब की संस्कृति और मेहमाननवाजी से रूबरू होंगे विदेशी खिलाड़ी
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों, अधिकारियों और दर्शकों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब अपनी उदारता और मेहमाननवाजी के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाली टीमें पंजाब के लोगों, गांवों, संस्कृति और पारंपरिक व्यंजनों की अच्छी यादें लेकर अपने देश लौटेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों में अलग-अलग देशों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोगों को करीब लाने की खास क्षमता होती है। खिलाड़ी भले ही अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व करते हों, लेकिन खेल प्रतियोगिताएं आपसी सम्मान, अनुशासन और मित्रता को बढ़ावा देती हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भाग लेने वाले देशों के बीच अच्छे संबंध मजबूत होंगे। साथ ही, इस आयोजन को देखने आने वाले हजारों युवा हॉकी और दूसरे खेलों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
आयोजन में सहयोग देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाली सभी टीमों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन को सफल बनाने के लिए कई विभागों और लोगों को मिलकर काम करना पड़ता है।
उन्होंने आयोजन से जुड़े अधिकारियों, स्वयंसेवकों, सुरक्षा कर्मियों और पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले सभी कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी लोगों की मेहनत से ही खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकती है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि पंजाब को अपनी ऐतिहासिक धरती पर हॉकी जगत का स्वागत करते हुए गर्व महसूस हो रहा है। ‘हीरो एशियन चैंपियंस ट्रॉफी पंजाब-2026’ राज्य की शानदार हॉकी विरासत का उत्सव मनाने और नई पीढ़ी को इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि पंजाब और हॉकी का रिश्ता केवल खेल इतिहास का एक अध्याय नहीं है, बल्कि यह साहस, प्रतिबद्धता और राष्ट्रीय गौरव की जीवंत विरासत है।
उद्घाटन समारोह में कई मंत्री और खेल जगत की हस्तियां रहीं मौजूद
चैंपियनशिप के उद्घाटन समारोह से पहले हॉकी पंजाब के अध्यक्ष नितिन कोहली और हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया।
इस अवसर पर पंजाब के कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत, विधायक बलकार सिंह और ईशान चब्बेवाल भी मौजूद रहे। इनके अलावा, खेल विभाग के प्रमुख सचिव वरुण रूजम, खेल निदेशक अभिजीत कपलिश, जालंधर के मेयर विनीत धीर और पर्यटन सलाहकार दीपक बाली ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
समारोह में हॉकी पंजाब और हॉकी इंडिया के प्रतिनिधियों के साथ ओलंपियन, पूर्व खिलाड़ी, खेल प्रेमी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम के जरिए पंजाब ने एक बार फिर भारतीय हॉकी में अपने ऐतिहासिक योगदान को याद किया और भविष्य में बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी करने का संकल्प दोहराया।


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