समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को आज, सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) से फिलहाल किसी तरह की कोई राहत नहीं मिली है। सोमवार, 2 नवंबर 2026 को, उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तरफ से अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की थी। उनके वकील, निजाम पाशा ने मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष तत्काल सुनवाई करने की अपील की। लेकिन अदालत ने इस अपील को ठुकराते हुए तत्काल सुनवाई करने से मना कर दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में इस सप्ताह के अंत में सुनवाई होगी। गौरतलब है कि गाजियाबाद की एक स्पेशल कोर्ट ने आजम खान को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार
बता दें कि आजम खान की ओर से पेश वकील निजाम पाशा ने जल्द सुनवाई की मांग करते हुए तर्क दिया कि यह गिरफ्तारी गैर-कानूनी थी। इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। 29 अक्टूबर को, आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड रखने से जुड़े एक मामले में जमानत मिल गई थी। 31 अक्टूबर को रामपुर जेल से रिहा होने के कुछ ही समय बाद, ED ने उन्हें जौहर ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया।
जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा है मामला
1 नवंबर को, गाजियाबाद की एक विशेष अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। ED का आरोप है कि रामपुर में मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी सरकारी फंड के दुरुपयोग से बनाई गई थी। एजेंसी ने यूनिवर्सिटी की लगभग 1,170 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त कर ली है। अब सुप्रीम कोर्ट उनकी गिरफ्तारी और उसके बाद दिए गए रिमांड आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। जेल से जमानत पर रिहा होते ही, आजम खान को ED ने एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया; अब वे इस गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं।


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