लखनऊ :किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के दंत संकाय के नए बहुमंजिला भवन निर्माण के लिए भूमि आवंटन को लेकर विवाद गहरा गया है। सामाजिक चेतना फाउंडेशन (न्यास) ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल/कुलाधिपति को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि दंत संकाय को मिलने वाली 3.5 एकड़ भूमि को घटाकर 1¼ एकड़ कर दिया गया है और उसमें भी केवल 20,150 वर्ग फुट में ही निर्माण की अनुमति दी जा रही है।
क्या है मामला?
सामाजिक चेतना फाउंडेशन के संस्थापक एवं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह यादव ने 11 जून 2026 को राज्यपाल को भेजे पत्र में कहा कि केजीएमयू के पुराने दंत संकाय भवन के पीछे एवं क्वीन मैरी अस्पताल के बगल में कुल 3½ एकड़ भूमि थी। यहां लोअर बेसमेंट, अपर बेसमेंट और 10वें फ्लोर तक नया भवन प्रस्तावित था।
फाउंडेशन का आरोप है कि वर्तमान कुलपति एवं कुलसचिव ने दंत संकाय को प्राप्त 1¼ एकड़ भूमि को भी घटाकर मात्र प्रथम तल 20,150 वर्ग फुट, द्वितीय तल 28,310 वर्ग फुट, तृतीय तल 17,160 वर्ग फुट करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। इससे दंत संकाय को अस्पताल की पूर्ववत स्थिति से उपेक्षित एवं नगण्य बना दिया गया है।
फाउंडेशन का आरोप
पत्र में कहा गया है कि “वर्तमान कुलपति व कुलसचिव की संकीर्ण विचारधारा ने दंत संकाय को प्राप्त 1¼ एकड़ भूमि को भी बहुत कम 20,150 वर्ग फुट करके प्रस्ताव शासन को गुमराह कर भेजने की तैयारी कर दी और दंत संकाय को सड़क के दोनों तरफ टुकड़े-टुकड़े में बांटने की कोशिश की जा रही है।” फाउंडेशन ने मांग की है कि दंत संकाय के पीछे की सम्पूर्ण 3½ एकड़ भूमि दंत संकाय के लिए ही आवंटित की जाए जिससे भविष्य में डेंटल विश्वविद्यालय को और ज्यादा प्रसारित किया जा सके जो भारतवर्ष में ही नहीं वरन विश्व में अपनी पहचान बना सके।
डेंटल संकाय का गौरवशाली इतिहास
पत्र में बताया गया है कि इस विभाग की स्थापना वर्ष 1949 में ई.एन.टी. विभाग के एक छोटे से हिस्से के रूप में हुई थी। दशकों के विस्तार के बाद अब यह भारत के सबसे बड़े और बेहतरीन दंत चिकित्सा संस्थानों में से एक है। सन 1950 में इसे ई.एन.टी. विभाग से अलग करके एक स्वतन्त्र दंत चिकित्सा विभाग बनाया गया।
1951-1952 में इसे कॉलेज का दर्जा मिला और 1980 में यह एक पूर्ण दंत संकाय बना। वर्ष 2004 में इसे किंग जॉर्ज डेंटल साइंस विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया। वर्तमान में यहां 300 छात्र-छात्राएं और 60 शिक्षक हैं। केजीएमयू प्रशासन का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। राजभवन की ओर से इस पत्र पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर सबकी नजर है।


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