दिल्ली में अमित शाह से मिले ओपी राजभर, चुनाव से पहले योगी सरकार में होंगे शामिल ?

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महाराष्ट्र के बाद अब उत्तर प्रदेश में सियासी हलचल बढ़ी गई है। क्योंकी बीते दिनों खबर आ रही थी की ओपी राजभर जल्द ही अमित शाह से मुलाकात करेंगे। तबसे कयास लगाए जा रहे थे कि सुभासपा NDA में शामिल हो सकती है। बीते दिनों यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने ओपी राजभर के साथ मुलाकात की थी।

महाराष्ट्र के बाद अब उत्तर प्रदेश में सियासी हलचल बढ़ी गई है। क्योंकी बीते दिनों खबर आ रही थी की ओपी राजभर जल्द ही अमित शाह से मुलाकात करेंगे। तबसे कयास लगाए जा रहे थे कि सुभासपा NDA में शामिल हो सकती है। बीते दिनों यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने ओपी राजभर के साथ मुलाकात की थी। कई दिनों के बाद आखिर राजभर ने सभी कयासों को किनारे करते हुए शाह से मुलाकात की।
 ब्रजेश पाठक ने गठबंधन को लेकर की थी बात
सूत्रों के अनुसार ब्रजेश पाठक की दिल्ली में अमित शाह से इस सिलसिले में सोमवार को बात हो गई है। अब पार्टी के पूरे हाईकमान की हरी झंडी मिलते ही गठबंधन पर मुहर लग जाएगी। एनडीए में शामिल होने के लिए सुभासपा पहले ही मन बना चुकी थी।प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के साथ धर्मपाल सिंह काफी पहले से इस ऑपरेशन में लगे हुए थे।
अमित शाह से मिलने पहुंचे राजभऱ
  बाद में सीएम योगी को भी मना लिया गया था। ओम प्रकाश राजभर दिल्ली दौरे पर गए थे। जहां उनकी मुकालात दो बार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हो चुकी है। इसके बाद जैसे ही हाई कमान गठबंधन को हरी झंडी दिखा देगा उसके बाद  सुबासपा बीजेपी मेंं  शामिल हो जाएगी। बीते दिनों जब अमित शाह लखनऊ आए थे तो भूपेंद्र चौधरी से इस गठबंधन को लेकर चर्चा भी हुई थी।
गठबंधन में इस वजह से पेंच फसेगा
दावा किया जा रहा है कि कुछ सीटों को लेकर पेंच फंसा हुआ है। किस सिंबल पर राजभर लोकसभा चुनाव लड़ेंगे इसे लेकर बात फंसी हुई थी।इसी मामले को लेकर ही 2019 में भी राजभर एनडीए से अलग हुए थे। राजनीति के जानकार बताते हैं कि 2019 में राजभर की जिद्द थी कि उनके बेटे अरविंद राजभर को छड़ी चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ाया जाए।
 2019 में बीजेपी से टूट गया था गठबंधन
हालांकि 2019 में बीजेपी ने राजभर का ये सुझाव नहीं माना था। उनका कहना था कि जैसे ही सहयोगी निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद संत कबीर नगर से लोकसभा का चुनाव बीजेपी के सिंबल पर लड़ना चाहते हैं।  वैसे ही घोषी सीट से अरविंद राजभर भी प्रत्याशी बन सकते हैं। जबकि राजभर को ये मंजूर नहीं था और गठबंधन टूट गया था।
ओपी राजभर को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है
सूत्रों की मानें तो अब एनडीए में शामिल होने के बाद सुभासपा प्रमुख को पहले की तरह कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा।  इसके अलावा उनके बेटे अरविंद राजभर को बसपा से हारी हुई गाजीपुर लोकसभा सीट का प्रत्याशी बनाया जाएगा।  राजभर भी खुद गाजीपुर जिले की एक सीट से विधायक हैं। सूत्रों का दावा है कि पिछला चुनाव लड़कर हार चुके मनोज सिन्हा कश्मीर के एलजी हैं। उन्होंने खुद पार्टी हाईकमान से गाजीपुर सीट पर चुनाव लड़ने की अनिच्छा जाहिर की है। तो इस बत को लेकर भी पेंच फस सकता है।

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