बैंक लॉकर में रखे गहने चोरी हों तो कौन देगा पैसे? कानपुर के इस SBI केस से समझें पूरा नियम

Summary :

SBI Bank Locker Theft: कानपुर में बैंक लॉकर से करीब 50 लाख रुपये के गहने गायब होने का मामला सामने आया है। घटना के बाद बैंक लॉकर की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। RBI नियमों के अनुसार, बैंक की लापरवाही साबित होने पर ग्राहक को सालाना लॉकर किराए का 100 गुना तक मुआवजा मिल सकता है।

SBI Bank Locker Theft: कानपुर के स्वरूप नगर से बैंक लॉकर की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला ने करीब 17 साल तक बैंक लॉकर में अपने सोने के गहने और दूसरी कीमती चीजें रखीं। इन सामान की कीमत करीब 50 लाख रुपये बताई जा रही है। लंबे समय बाद जब महिला लॉकर खोलने पहुंची तो अंदर से सभी गहने गायब मिले। इसके बाद महिला ने बैंक अधिकारियों को जानकारी दी और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल मामले की जांच चल रही है। इस घटना ने उन लोगों की चिंता बढ़ा दी है, जो बैंक लॉकर में गहने और जरूरी दस्तावेज रखते हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि अगर बैंक लॉकर से सामान गायब हो जाए तो बैंक की जिम्मेदारी कितनी होती है और कस्टमर्स  को कितना मुआवजा मिल सकता है?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,  आमतौर पर लोगों को लगता है कि बैंक लॉकर में सामान रखने के बाद उसकी पूरी जिम्मेदारी बैंक की होती है। लेकिन नियम ऐसा नहीं कहते। बैंक लॉकर मुख्य रूप से सामान रखने की सुविधा है। बैंक को यह जानकारी जरूरी नहीं होती कि कस्टमर  ने लॉकर के अंदर क्या रखा है और उसकी कीमत कितनी है। लेकिन , इसका मतलब यह नहीं है कि सामान चोरी होने पर बैंक की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। अगर जांच में बैंक की लापरवाही सामने आती है, तो कस्टमर मुआवजे का दावा कर सकता है।

कितना मुआवजा मिल सकता है?

अगर लॉकर की सुरक्षा में बैंक की तरफ से लापरवाही हुई है तो बैंक को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। उदाहरण के लिए, बैंक की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो, CCTV काम नहीं कर रहे हों, सुरक्षा में जरूरी इंतजाम नहीं किए गए हों या कर्मचारियों की गलती से लॉकर से सामान गायब हुआ हो। इसी तरह लॉकर से जुड़े रिकॉर्ड ठीक से नहीं रखे गए हों या बैंक की किसी दूसरी लापरवाही के कारण नुकसान हुआ हो, तो ग्राहक बैंक से मुआवजे की मांग कर सकता है।

RBI के लॉकर नियमों के अनुसार, बैंक की लापरवाही साबित होने पर कस्टमर  को अधिकतम लॉकर के सालाना किराए का 100 गुना तक मुआवजा मिल सकता है। मान लीजिए किसी लॉकर का सालाना किराया 5,000 रुपये है। ऐसी स्थिति में मुआवजे की अधिकतम सीमा 5 लाख रुपये तक हो सकती है। हालांकि, यह रकम लॉकर में रखे सामान की वास्तविक कीमत के बराबर होना जरूरी नहीं है। यानी अगर लॉकर में 50 लाख रुपये के गहने रखे थे, तो बैंक की जिम्मेदारी साबित होने पर भी ग्राहक को हर हाल में 50 लाख रुपये का मुआवजा मिले, ऐसा नियम नहीं है।

लॉकर इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप बैंक लॉकर में गहने या दूसरी कीमती चीजें रखते हैं, तो उनकी जानकारी और दस्तावेज अपने पास रखना बेहद जरूरी है।

  • लॉकर में रखे सामान की पूरी सूची तैयार रखें।
  • गहनों की साफ तस्वीरें अपने पास सुरक्षित रखें।
  • गहनों की खरीद की रसीद और बिल संभालकर रखें।
  • लॉकर एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ें।
  • लॉकर कब खोला और कब बंद किया, इसका रिकॉर्ड रखें।
  • सामान गायब होने या नुकसान की जानकारी मिलते ही बैंक को बताएं।
  • जरूरत पड़ने पर तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं।
  • ज्यादा कीमती सामान के लिए अलग से बीमा कराने पर भी विचार करें।

केवल बैंक लॉकर पर निर्भर रहना ठीक नहीं

बैंक लॉकर कीमती सामान रखने का सुरक्षित विकल्प है, लेकिन ग्राहक को यह नहीं मानना चाहिए कि किसी भी नुकसान की स्थिति में बैंक पूरी रकम की भरपाई करेगा। बैंक की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उसकी लापरवाही से जुड़े मामलों में तय होती है।

इसलिए लॉकर में रखे सामान के बिल, फोटो और दूसरे जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखना बहुत जरूरी है। भविष्य में चोरी या किसी विवाद की स्थिति में यही दस्तावेज सामान के मालिकाना हक और कीमत को साबित करने में मदद कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें: आबान अहमद की कार एक्सीडेंट का Video आया सामने, ऐसे हुआ था पूरा हादसा

Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।