Chhath Puja Nahay khay Niyam: छठ पूजा यानी बिहारियों के लिए इमोशन। जी हां, आपने सही सुना। छठ पूजा का इंतज़ार महीनों से होता है। वो दिन दूर नहीं जब बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक सभी में ख़ुशी और आस्था दिखाई देगा। छठ पूजा कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू हो जाता है। इस साल 2025 का छठ पूजा 25 अक्टूबर नहाय खाय से शुरू होगा। छठ पूजा के पहले दिन नहाय खाय किया जाता है। इसके बाद खरना करते हैं।
वहीं षष्ठी तिथि को अस्तगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है यानी शाम का घाट और अंतिम दिन उदय होते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है यानी सुबह का घाट. ऐसे में चलिए जानते हैं छठ पूजा के पहले दिन यानी नहाय खाय में क्या करते हैं और क्या हैं इससे जुड़े नियम?
Nahay khay timing: कब हैं नहाय खाय?

छठ पूजा कल यानि शनिवार 25 अक्टूबर 2025 को नहाय खाय के साथ शुरू होगी। इस दिन व्रती सुबह-सुबह स्नान-ध्यान कर विधि-विधान से सूर्य देव की पूजा करती हैं। इसके बाद शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं। भोजन में अरवा चावल, चने की दाल और लौकी की सब्जी खाती हैं। कई ज्योतिष आचार्य का मानना है कि इस साल नहाय खाय के दिन दो दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दौरान पूजा करने से व्रती को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
Nahay Khay Vidhi: नहाय खाय विधि

छठ पूजा के पहले दिन नहाय खाय पर व्रती सुबह-सुबह नहा-धोकर सूर्य देव की पूजा करती हैं। इस दिन व्रती अपने आसपास के नदियों में डुबकी लगाती हैं। अगर आपके घर के आसपास कोई नदी नहीं है तो आप नहाने के पानी में गंगाजल डालकर भी स्नान कर सकते हैं। इस दिन से महापर्व शुरू हो जाता है। इसलिए अपने घर और किचन को भी स्वच्छ करना चाहिए। इस दिन पूजा स्थल की भी अच्छे से सफाई करनी चाहिए। पूजा करते समय छठी मैया का ध्यान करते हुए चार दिनों के व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
Nahay khay me kya khaye: नहाय खाय में ये खाना बेहद शुभ
नहाय खाय के दिन व्रती शाकाहारी भोजन करती हैं। भोजन ग्रहण के दौरान भी व्रती छठी मैया का ध्यान करती हैं और व्रत का संकल्प लेती हैं। भोजन में कद्दू या लौकी की सब्जी, चने की दाल, अरवा चावल का भात खाती हैं। इस दिन लौकी के पकौड़े भी खाए जाते हैं। दही का भी सेवन करते हैं। नहाय खाय के खाने में लहसुन-प्याज शामिल नहीं किया जाता। खाने में सेंधा नमक ही इस्तेमाल किया जाता है।
Chhath Puja 2025: कब है पहला अर्घ?

वैदिक पंचांग के अनुसार, छठ का महापर्व 25 अक्टूबर, शनिवार को नहाय खाय के साथ शुरू होगा। यह चार दिनों तक चलेगा और मंगलवार को समाप्त होगा। 26 अक्टूबर को खरना, 27 अक्टूबर को संध्या अर्ध्य और 28 अक्टूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
Chhath Puja Nahay khay Niyam: यहां देखें कौन सी पूजा कब है?
| दिन | तिथि (2025) | दिन का नाम | प्रमुख क्रिया / महत्व |
|---|---|---|---|
| 1️⃣ | 25 अक्टूबर (शनिवार) | नहाय-खाय | व्रत की शुरुआत, स्नान करके शुद्ध भोजन (कद्दू-भात) ग्रहण किया जाता है। |
| 2️⃣ | 26 अक्टूबर (रविवार) | खरना (लोहंडा) | सूर्यास्त के बाद गुड़-चावल की खीर बनाकर प्रसाद चढ़ाया जाता है, फिर व्रती निर्जला उपवास शुरू करते हैं। |
| 3️⃣ | 27 अक्टूबर (सोमवार) | संध्या अर्घ्य | अस्त होते सूर्य को नदी या तालाब में अर्घ्य दिया जाता है। |
| 4️⃣ | 28 अक्टूबर (मंगलवार) | ऊषा अर्घ्य (भोर का अर्घ्य) | उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है। |
नहाय खाय (Nahay Khay)- पूजा का पहला दिन

नहाय खाय से छठ पूजा शुरू होती है। इस दिन व्रती सुबह-सुबह किसी पवित्र नदी में स्नान करके भगवान सूर्य देव की उपासना करती हैं। और खाने में सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं।
सूर्योदय की बात करें तो इस दिन सुबह 6 बजकर 28 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 42 मिनट पर होगा.
खरना (Kharna): महापर्व का दूसरा दिन

महापर्व का दूसरा दिन यानी खरना। खरना को कई जगहों पर लोहंडा भी कहा जाता हैं। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जल व्रत रखती हैं। शाम होने पर मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर गुड़ की खीर और रोटी बनाती हैं। इसके बाद सूर्य देव को प्रसाद अर्पित कर घरों में सबको दिया जाता है. प्रसाद देने के बाद व्रती खुद इसी प्रसाद को ग्रहण करती हैं। इसके बाद अगले दिन सूर्य देव को अर्घ देने तक व्रती निर्जल रहती हैं और पूजा करती हैं।
संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya)- छठ पूजा का तीसरा दिन

छठ पूजा का तीसरा दिन और महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन व्रती दिनभर बिना कुछ खाय पिए निर्जल रहती हैं। और अगले दिन ऊषा अर्घ्य देने के बाद व्रती प्रसाद ग्रहण कर भोजन करती हैं।
ऊषा अर्घ्य (Usha Arghya)- पूजा का अंतिम दिन

ऊषा अर्घ्य यानी पूजा का चौथा और आखिरी दिन होता है। इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर होगा. अर्घ्य देने के बाद, 36 घंटे का व्रत प्रसाद और जल ग्रहण करके खोला जाता है, जिसे पारण कहा जाता है.


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