Mangalsutra Pehne Ke Niyam: हिंदू धर्म में मंगलसूत्र को शादीशुदा महिलाओं के सुहाग की निशानी होती है। इसलिए शादी होने के बाद इसे पहनना सबसे जरूरी माना गया है। यह सिर्फ गहना नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट प्यार और सुरक्षा की पहचान है। परंपराओं के अनुसार, मंगलसूत्र से जुड़े कुछ नियमों को मानना बहुत जरूरी है ताकि शादीशुदा जिंदगी में खुशहाली और सुख-शांति बनी रहे। आइए जानें वो नियम कौन से हैं।
Mangalsutra Pehne Ke Niyam: मंगलसूत्र को धारण करने के नियम

1. शुभ दिन और पूजा का महत्व
मंगलसूत्र खरीदने के लिए मंगलवार का दिन अच्छा नहीं माना जाता। नया मंगलसूत्र पहनने से पहले उसे माता पार्वती को चढ़ाना शुभ होता है। करवाचौथ पर इसकी पूजा करने से पति की उम्र लंबी होने का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
2. सही धातु और बनावट
मंगलसूत्र हमेशा सोने और काले मोतियों से बना होना चाहिए। माना जाता है कि सोना भगवान शिव का और काले मोती माता पार्वती का प्रतीक हैं। इन दोनों का साथ होना पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाता है और बुरी नजर से बचाता है।
3. पहनने के नियम
मंगलसूत्र हमेशा गले में ही पहनना चाहिए, इसे हाथ में बांधना गलत माना जाता है। शादी वाला मंगलसूत्र बहुत कीमती होता है, इसलिए इसे बार-बार नहीं बदलना चाहिए। यह आपके रिश्ते में भरोसे और जुड़ाव को दर्शाता है।
इन बातों का भी रखें ध्यान
कभी भी किसी दूसरे मर्द का दिया हुआ मंगलसूत्र न पहनें, इसे अशुभ माना जाता है। अपना मंगलसूत्र किसी और को न दें और न ही किसी दूसरे का पहना हुआ पहनें। मंगलसूत्र को बार-बार गले से उतारना भी ठीक नहीं है, क्योंकि यह शादी की मजबूती का प्रतीक है।
इन नियमों का पालन करने से पति-पत्नी के बीच प्यार, भरोसा और स्थिरता बढ़ती है। साथ ही, इससे घर में सकारात्मक माहौल रहता है और सुख-समृद्धि आती है।
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इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।


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