Navratri Akhand Jyoti Vidhi Niyam: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा बहुत खास मानी जाती है। इन नौ दिनों में लोग मां के अलग-अलग रूपों की पूजा करते हैं और कई घरों में अखंड ज्योत भी जलाई जाती है। पंचांग के अनुसार, साल 2026 में शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होगी और 19 अक्टूबर को महानवमी के दिन समाप्त होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान इस ज्योत को बिना बुझे लगातार जलाए रखना एक परंपरा है। आइए, जानते हैं कि इन नौ दिनों में अखंड ज्योत जलाने के क्या नियम हैं।
अखंड ज्योत क्यों जलाते हैं?

हिंदू धर्म में किसी भी पूजा या धार्मिक काम में दीया जलाना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि दीये की रोशनी अंधेरे को दूर करती है और सकारात्मकता लाती है। ‘अखंड ज्योत’ उस दीपक को कहते हैं जिसे नवरात्रि के पहले दिन से लेकर पूजा समाप्त होने तक लगातार जलाए रखा जाता है। कई घरों में कलश स्थापना के समय ही मां दुर्गा के सामने यह दीपक प्रज्वलित कर दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक को ज्ञान, रोशनी और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि घर में अखंड ज्योत घर के पूजा घर में हमेशा सकारात्मक माहौल बनाए रखता है।
घी या तेल, किसका दीपक जलाएं?
अखंड ज्योत जलाने के लिए कई घरों में घी का इस्तेमाल किया जाता है, तो कुछ लोग तेल का दीपक भी जलाते हैं। इस बारे में अलग-अलग परिवारों और रीति-रिवाजों में अलग-अलग नियम होते हैं। इसलिए आपके परिवार में जो भी परंपरा हो, आप उसके हिसाब से घी या तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं।
अखंड दीपक कैसे जलाएं?

- नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के समय गणेश जी, भगवान शिव और मां दुर्गा का ध्यान करके अखंड ज्योति जलाने का संकल्प लें।
- दीपक के लिए पीतल, चांदी या मिट्टी का शुद्ध दीया इस्तेमाल करें।
- दीया में शुद्ध गाय का घी या तिल/सरसों का तेल डालें।
- सूती रुई या मौली से बनी लंबी और मोटी बाती का इस्तेमाल करें जो आसानी से नौ दिन तक चले।
- अगर आप घी का दीपक जला रहे हैं, तो उसे माता दुर्गा के दाएं ओर रखें।
- अगर आप तेल का दीपक जला रहे हैं, तो उसे माता के बाएं ओर रखें।
- दीपक को कभी भी सीधे जमीन पर न रखें, चौकी पर कमल का फूल बनाकर उसके बीच में रखें।
- दीया प्रज्वलित करते समय यह मंत्र पढ़ें: शुभं करोति कल्याणमरोय्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशय दीपज्योतिर्नमोस्तुते॥
अगर अखंड ज्योत गलती से बुझ जाए तो क्या करें?
अगर गलती से अखंड ज्योत बीच में अचानक बुझ जाए तो ऐसे में घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। बस अपने पूजा घर को साफ-सुथरा करें और अपनी परंपरा के अनुसार भगवान से क्षमा मांगते हुए दोबारा दीया जला लें।
नवरात्रि में अखंड ज्योत जलाने का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक को अंधेरे से उजाले की तरफ ले जाने का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के दौरान दीया जलाने की परंपरा भी इसी भावना से जुड़ी हुई है। भक्त अखंड ज्योत जलाकर मां दुर्गा के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करते हैं।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।


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