साल 2019 की चार धाम यात्रा शुरू हो गई है। इस चारों धाम में बद्रीनाथ धाम में भगवान विष्णु के स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है। वैसे इस धाम को बैकुंठ धाम भी कहा जाता है। इस साल ये यात्रा 7 मई से शुरू हो गई है और बदरीनाथ धाम के भी श्रद्घालुओं के लिए ये 10 मई के दिन से खोले गए थे।
बता दें कि बद्रीनाथ धाम के दर्शन के लिए लोग देश से ही नहीं बल्कि विदेश से भी आते हैं। लेकिन आपको बता दें कि आने वाले कुछ सालों बाद बद्रीविशाल के दर्शन यहां पर नहीं हो सकेंगे। आपको ये बात जानकर हैरानी होगी कि आने वाले कुछ समय में यहां पर बदरीनाथ धाम के दर्शन हो पाना संभव नहीं हो सकेगा। कुछ धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जोशीमठ में भगवान नरसिंह की मूर्ति है जिसका एक हाथ पतला होता जा रहा है।
ऐसा माना जाता है कि जिस दिन भी ये हाथ टूटकर गिर जाएगा उसी दिन से नर नारयण पर्वत भी आपस में मिल जाएंगे और तभी से बदरीनाथ जाने वाले मार्ग को बंद कर दिया जाएगा। जिससे वर्तमान में बदरीनाथ का मार्ग बंद हो जाएगा और इसके बदले नई जगह पर बदरीनाथ के आप दर्शन कर सकेंगे।
फिर यहां होंगे बद्रीनाथ के दर्शन
तपोवन से लगभग 4 किलोमीटर दूर एक सुभाई गांव है जहां पर पहाड़ी पर एक छोटा-सा मंदिर स्थित है। इतना ही नहीं इस मंदिर को भविष्य बदरी के नाम से जाना जाता है। इस भविष्य बद्री नाम से मशहूर मंदिर जहां पर भविष्य में भगवान बद्रीनाथ में दर्शन देंगे।
यह जगह जंगल में वृक्षों के बीच में हैं। वहीं भविष्य बद्री के पुजारी का कहना है कि धीरे-धीरे इस पत्थर पर भी भगवान की दिव्य आकृति और बदरीश पंचायत के सभाओं के देवताओं की आकृति आ रही है। यहां पर भगवान बद्रीनाथ की मूर्ति दिव्य और आकर्षक रूप से दृष्टिगत हो रही है। ऐसा माना जाता है कि जो धार्मिक मान्यताओं में बात बोली जाती है वो साफ दिखाई दे रही है।
एक नहीं बल्कि यहां हैं 5 बद्री
बता दें कि भगवान बदरी के भी पंच केदार की तरह ही पंच बदरी में विग्रह भी हैं। इन पंच बदरी का संबंध भी अलग-अलग काल से है। जहां आज हम बदरीनाथ की पूजा-अर्चना करते है उस धाम की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने 8 वीं शताब्दी में करी थी। इसके अलावा ध्यान बदरी,वृद्घ बदरी,योगध्यान बदरी और भविष्य बदरी का महत्व भी है।


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