लॉकडाउन की पूरी सच्चाई हुई कैमरे में कैद, इस तरह दर्द में अपना एक-एक दिन काटने को मजबूर है ये लोग

Summary :

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के मामले दिन पर दिन काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। इस वायरस की रोकथाम के लिए देशभर में लॉकडाउन किया हुआ है।

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के मामले दिन पर दिन काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। इस वायरस की रोकथाम के लिए देशभर में लॉकडाउन किया हुआ है। लेकिन कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन के चलते प्रवासी मजदूरों को इस समय सबसे ज्यादा मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
क्योंकि न तो उनके पास खाने को एक वक्त की रोटी,रोजगार और न ही रहने के लिए घर है। देश के अलग-अलग हिस्सों में से आये इन दिहाड़ी मजदूरों के पास दर-दर की ठोकरें खाने के सिवाए फिलहाल इनके पास कुछ भी नहीं है। हाल ही में ऐसी ही कुछ तस्वीरें दिल्ली में यमुना किनारे नजर आईं। जहां पर यमुना नदी के किनारे पुल के नीचे सैंकड़ो मजदूर अपना जिंदगी के पल कुछ इस तरह बीता रहे है।  
दरअसल यमुना नदी के पास में पिछले कई दिनों से हजारों की संख्या में लोग रह रहे हैं। इस बीच सरकार ने यह दावा जरूर किया की इन लोगों को शेल्टर होम में रखने की सुविधा की गयी है और खाने समय पर दिया जा रहा है साथ ही इनके लिए जरूरत की चीजें मुहैया कराई गयी, लेकिन यहां का सच कुछ अलग ही है।
 11 अप्रैल को इनके लिए बनाए गए शेल्टर में कुछ शरारती तत्वों ने आग लगा दी जिसके बाद ये लोग पुल के किनारे सोने को मजबूर है। 
ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या 13,387 हो गई है। देश में कोरोना से अब तक 437 लोगों की मौत हो चुकी है हालांकि 1,749 मरीज इस बीमारी को हराने में कामयाब भी हुए हैं। कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ जारी जंग में भारत सरकार ने लॉकडाउन को बढ़ा दिया गया है। अब देश में 3 मई तक लॉकडाउन रहेगा।

Desk Team