पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कल यानी 25 अगस्त 2026 को सुनवाई हुई। इस दौरान चौंकाने वाले कई आंकड़े सामने आए हैं। RTI से मिली डेटा के अनुसार, करीब 7 लाख अपीलों में वोटर लिस्ट से हटाए गए नाम फिर से बहाल करने की मांग की गई है, जबकि 31 लाख अपीलों में वोटर लिस्ट में नाम शामिल किए जाने को बड़ी चुनौती भी दी गई है। इन आंकड़ों के आधार पर, कोर्ट ने 19 स्पेशल अपीलेट ट्रिब्यूनल में एनफोर्समेंट मामलों की संख्या और प्रकृति के बारे में चुनाव आयोग से एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट के इस निर्देश के बाद, अब इस मामले में अगली सुनवाई और फैसले का इंतजार है।
कोर्ट रूम में क्या-क्या हुआ?
बता दें कि बंगाल SIR को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान TMC सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि SIR तो एक बहाना है कई लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं। इतना ही नहीं उन्होंने आरोप लगाया कि इस SIR की तहत एक विशेष समुदाय के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। आगे कहा कि SIR से जुड़ा पूरा डेटा सार्वजनिक नहीं किया गया है। सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कोर्ट को बताया कि लगभग 38.10 लाख अपीलें लंबित हैं।
SC ने हटाए गए वोटरों की अपीलों को प्राथमिकता देने की बात कही
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि जिन व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, उनकी अपील पर पहले सुनवाई की जानी चाहिए, क्योंकि इससे उनके वोट देने का अधिकार प्रभावित होता है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से ऐसी अपीलों की संख्या, लंबित मामलों और उनके निपटारे के संबंध में अधिक से अधिक जानकारी मांगी है।


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