अमेरिकी ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टॉफ जनरल मार्क मिले ने अफगानिस्तान में अमेरिकी उपस्थिति के 20 वर्षो के दौरान तालिबान के पाकिस्तान में छिपे रहने की कथित क्षमता को एक प्रमुख रणनीतिक मुद्दा बताया। उन्होंने अमेरिकी सीनेट समिति से कहा, पानाहगाह के रूप में पाकिस्तान के साथ प्रभावी ढंग नहीं निपटा गया, जो एक प्रमुख रणनीतिक मुद्दा है जिसे हमें वास्तव में उजागर करना होगा।
जनरल मिले ने मंगलवार को सीनेट की सुनवाई में भी इसी तरह की मांग करते हुए कहा, हमें पाकिस्तान के पानाहगाह की भूमिका की पूरी तरह से जांच करने की जरूरत है। डॉन न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी सेना प्रमुख ने अमेरिकी सांसदों को सूचित किया है कि अफगानिस्तान में नुकसान 20 साल के गलत फैसलों और खराब योजना का एक संचयी प्रभाव था और यह किसी एक कारक के कारण नहीं था, जिसमें कि तालिबान का पाकिस्तान में कथित पनाहगाह भी शामिल है।
बुधवार को हाउस आम्र्ड सर्विसेज कमेटी के समक्ष अपनी नवीनतम गवाही में, शीर्ष अमेरिकी जनरलों ने 15 अगस्त को काबुल के आसानी से तालिबान के कब्जे में आने के पीछे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के समझौते को भी दोषी ठहराया। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 11 सितंबर तक अफगानिस्तान से सभी अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने का ऐलान किया था। इसी मिशन के तहत अमेरिका लगातार काम भी कर रहा था, करीब 90 से 95 फीसदी सैनिकों को वापस बुला लिया गया, लेकिन यही फैसला भारी पड़ गया और अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हो गया।
जो बाइडेन ने तर्क दिया था कि अफगानी सैनिक जिस जंग को नहीं लड़ना चाह रहे हैं, ऐसे में अमेरिकी सैनिक अपनी जान क्यों दें। हमने अरबों रुपये खर्च किए हैं, 3 लाख से अधिक सैनिकों को ट्रेन किया है, मित्र देशों के साथ मिलकर काम किया है। हालांकि, जो बाइडेन की इन दावों से इतर जैसे अमेरिका ने आपाधापी में अपने सैनिकों को निकाला, उससे हालात बिगड़ते चले गए। यही कारण है कि मुश्किल वक्त में अफगानिस्तान को ऐसे छोड़कर जाने पर अमेरिका की दुनियाभर में थू-थू हो रही थी।


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