अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई को ‘पाइरेसी’ बताने पर विवाद, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की उठाई मांग

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तेहरान/वाशिंगटन, 3 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान को लेकर विवाद और गहरा गया है, जिसमें उन्होंने ईरानी जहाजों की जब्ती कार्रवाई को “पाइरेट्स जैसा” (समुद्री लुटेरों) बताया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की “सीधी स्वीकारोक्ति” करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बकाई ने एक्स प्लेटफॉर्म के जरिए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने “खुले तौर पर ईरानी जहाजों की अवैध जब्ती को ‘पाइरेसी’ बताया और गर्व से कहा कि हम पाइरेट्स की तरह काम करते हैं।” उन्होंने इसे कोई जुबानी चूक नहीं, बल्कि “अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के खिलाफ…

तेहरान/वाशिंगटन, 3 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान को लेकर विवाद और गहरा गया है, जिसमें उन्होंने ईरानी जहाजों की जब्ती कार्रवाई को “पाइरेट्स जैसा” (समुद्री लुटेरों) बताया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की “सीधी स्वीकारोक्ति” करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

बकाई ने एक्स प्लेटफॉर्म के जरिए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने “खुले तौर पर ईरानी जहाजों की अवैध जब्ती को ‘पाइरेसी’ बताया और गर्व से कहा कि हम पाइरेट्स की तरह काम करते हैं।” उन्होंने इसे कोई जुबानी चूक नहीं, बल्कि “अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की सीधी और गंभीर स्वीकारोक्ति” बताया।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, उसके सदस्य देशों और महासचिव से अपील की कि वे इस तरह के “खुलेआम अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन को सामान्य बनाने” के किसी भी प्रयास को सख्ती से खारिज करें।

यह विवाद उस समय सामने आया है जब ट्रंप ने फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका ने एक जहाज पर कब्जा कर उसका तेल और कार्गो अपने नियंत्रण में ले लिया और इसे “बहुत लाभदायक कारोबार” बताया।

ईरान पहले भी अमेरिकी कार्रवाई को “समुद्र में सशस्त्र लूट” और “पाइरेसी का वैधीकरण” बता चुका है। बकाई ने हाल ही में कहा था कि इस तरह की कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय कानून, मुक्त व्यापार और समुद्री सुरक्षा के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के सैन्य अभियान के बाद ईरान ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कड़ा कर दिया, जबकि अमेरिका ने जवाब में ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का ऐलान किया।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, नाकेबंदी लागू कराने के लिए कई जहाजों को पुनर्निर्देशित किया गया है। वहीं, अमेरिकी रक्षा नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी।

ईरान ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी नाकेबंदी समाप्त नहीं करता, तब तक वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ बनाए रखेगा।

–आईएएनएस

केआर/

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